लखनऊ में प्राग नरायन रोड हजरतगंज में 2800 वर्गमीटर क्षेत्रफल में नजूल की जमीन पर बने यजदान अपार्टमेंट पर लगभग आठ महीने बाद सोमवार को हथौड़ा चला। एलडीए ने मुंबई की एक्सपर्ट कंपनी को इसे ध्वस्त करने का ठेका दिया है। लालबाग के ओल्ड भोपाल हाउस निवासी शायम यजदानी बिल्डर के छह तल के इस अपार्टमेंट में 48 फ्लैट हैं। इनमें से 36 बिक चुके हैं और रजिस्ट्री भी हो चुकी है। अपार्टमेंट को जमींदोज किए जाने से इनके करीब 20 करोड़ रुपये डूब गए हैं।
सोमवार सुबह 10:45 बजे कंपनी के 50 कामगारों ने जोन छह के जोनल प्राधिकारी (प्रवर्तन) राम शंकर के नेतृत्व में छठे तल से छेनी-हथौड़े से अपार्टमेंट तोड़ना शुरू किया। अपार्टमेंट के मालिक के परिवारीजन व फ्लैट खरीदारों ने इसका विरोध किया, लेकिन पुलिस ने सबको खदेड़ दिया। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने कार्रवाई का मौका मुआयना किया।
46 लाख का ध्वस्तीकरण ठेका
एलडीए ने यजदान अपार्टमेंट तोड़ने के लिए टेंडर से चुनी गई कंपनी को एक माह की मोहलत दी है। इसके कामगार छेनी-हथौड़े से छठा व पांचवां तल तोड़ने के बाद फिर नीचे से पिलर काटकर पूूरे अपार्टमेंट को गिरा देंगे।
इनकी छत्रछाया में बना अपार्टमेंट
एलडीए के कई अभियंताओं की छत्रछाया में यजदान अपार्टमेंट खड़ा हुआ। इसमें कई सचिव एवं उपाध्यक्ष तक की सरपरस्ती रही है। इसकी आधारशिला पड़ने से लेकर छह तल तक बन जाने के दौरान पूर्व विहित अधिकारी जहूीरुद्दीन एवं कमलजीत सिंह, सहायक अभियंता इस्माइल, जेई रवींद्र श्रीवास्तव, जहूर आलम, एनएस साख्या, संजय जिंदल, जितेंद्र कुमार दुबे, सुशील वर्मा तैनात रहे। इनमें जेई रवींद्र श्रीवास्तव एवं जितेंद्र कुमार दुबे लेवाना सुइट्स अग्निकांड में निलंबित हो चुके हैं।
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खरीदारों का दर्द
हमारे नुकसान की कैसे होगी भरपाई
यजदान अपार्टमेंट के चौथे तल पर अमीनाबाद के कारोबारी जुबैर ने 44 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा था। बताया कि वह इसकी रजिस्ट्री भी करवा चुके हैं। एलडीए ने खरीदारों का पक्ष दरकिनार करके अपार्टमेंट गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे में जुबैर का सवाल था कि उनके 50 लाख रुपये की भरपाई कैसे होगी?
बिल्डर से कीमत वसूल सकता था एलडीए
कैंट निवासी सुनीता गुप्ता भी अपार्टमेंट के दूसरे तल पर लगभग 50 लाख रुपये का फ्लैट खरीदकर रजिस्ट्री करवा चुकी हैं। उनकी बेटी ने कहा कि एलडीए अपार्टमेंट को गिराने के बजाय बिल्डर से जमीन कीमत वसूल कर खरीदारों को राहत दे सकता था। कार्रवाई से सबसे ज्यादा नुकसान तो खरीदारों को ही हुुआ है।