नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह व उसकी पत्नी कुसुम लता के अधिकार वाली कंपनियों के प्लाट आवंटन के खेल की कलई खुलने लगी है। आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह सिंडीकेट ने चार साल में 320 से अधिक प्लाट को हथियाए थे, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 750 करोड़ रुपये आंकी गई है।
यानी एक प्लाट की मौजूदा कीमत औसतन ढाई करोड़ रुपये है। यादव सिंह सिंडीकेट ने इन प्लाटों की खरीद फरोख्त पर बड़े पैमाने पर आयकर चोरी की है, जिनका आकलन किया जा रहा है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी ने साल 2011-12 में कुल 319 प्लाट को आवंटित किया, जिसमें 31 प्लाट यादव सिंह सिंडीकेट के खाते में आए। इन 31 प्लाट में पांच बड़े प्लाट शैक्षिक संस्थान और अन्य ग्रुप हाउसिंग व व्यावसायिक प्लाट शामिल हैं।
इसी प्रकार नोएडा अथॉरिटी ने चार साल में यादव सिंह की पत्नी कुसुम लता की कंपनियों को 320 से अधिक प्लाट आवंटित किए, जिसे यादव सिंह सिंडीकेट ने कंपनियों सहित बेच दिया है।
पत्नी की कंपनियों ने करोड़ों कमाए
आयकर छापामारी में यादव सिंह, कुसुम लता, राजेंद्र मनोचा, नम्रता मनोचा, अनिल पेशावरी के आवास एवं कार्यालय से प्लाट के जो दस्तावेज मिले हैं, उसकी जांच में पाया गया है कि इन प्लाटों को काफी महंगे दाम पर बेचकर करोड़ों रुपये कमाए गए थे।
सूत्र बताते हैं कि एक-एक प्लाट को दो से पंद्रह करोड़ कीमत में कंपनी सहित रियल एस्टेट कंपनियों को बेचा गया। यादव सिंह सिंडीकेट ने नोएडा अथॉरिटी के इन प्लाटों को दोबारा बेचकर जो मुनाफा कमाया, उसका उल्लेख आयकर रिटर्न में भी नहीं किया। सिंडीकेट करोड़ों रुपये के आयकर को डकार गया।
ईडी और सीएम को अगले हफ्ते रिपोर्ट
आयकर विभाग नोएडा ऑथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह और उसकी पत्नी कुसुमलता के ठिकानों पर छापामारी की रिपोर्ट अगले हफ्ते ईडी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेजेगा। उम्मीद है सोमवार शाम तक यह जांच रिपोर्ट पूरी हो जाएगी और बाकी के लॉकरों की जांच भी पूरी हो जाएगी।