केंद्र सरकार ने पुलिस की छवि सुधारने की पहल की है। इसके तहत पुलिस में भर्ती के समय मनोवैज्ञानिक परीक्षण की योजना है। इस परीक्षण में खरा उतरने वालों की ही पुलिस विभाग में नौकरी मिल सकेगी।
इतना ही नहीं, ट्रेनिंग के दौरान भी इनके व्यवहार पर नजर रहेगी और खामी नजर आने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
पुलिसकर्मियों द्वारा आम लोगों से अभद्रता के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इन पुलिसकर्मियों को पद से हटाने से लेकर निलंबन व अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है, लेकिन यह सिलसिला थम नहीं रहा।
यहां तक कि तबादले से खफा एक सिपाही ने दो दिन पहले लखनऊ की नाका कोतवाली में इंस्पेक्टर के सामने राइफल लहराई थी। लखनऊ में ही बीते दिनों एक सिपाही ने गोरखपुर के डीआईजी के निजी आवास में फांसी लगा ली।
नींद की गोलियों से परेशानी से निजात पाने में नाकाम एक इंस्पेक्टर ने घर में आत्मदाह कर लिया। पुलिसकर्मियों का तर्क है कि काम के बोझ व क्षमता से अधिक ड्यूटी की वजह से दिमागी तनाव के चलते इनका व्यवहार खराब हो जाता है।