आमतौर पर गलत पेपर खुलने के बाद परीक्षार्थियों से प्रश्नपत्र वापस ले लिया जाता था। इसके बाद उन्हें सही पेपर देकर परीक्षा कराई जाती है। यह पेपर सिर्फ परिसर में ही कराई जानी थी। इसलिए सेल से परीक्षा कक्ष तक पेपर पहुंचने में 10 मिनट से भी कम समय लगता। इसके बावजूद विवि प्रशासन ने परीक्षा शुरू करने के बजाय रद्द करके परीक्षार्थियों को वापस भेज दिया।
इससे यह सवाल उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि विवि प्रशासन इस विषय का प्रश्नपत्र छपवाना ही भूल गया। परीक्षार्थियों के जाने के करीब एक-डेढ़ घंटे बाद विवि प्रशासन ने परीक्षार्थियों को फोन करके दूसरी पाली में परीक्षा कराने की पेशकश भी की।
परीक्षार्थियों ने दूसरी पाली के बजाय 21 दिसंबर को पेपर कराने पर सहमति दी। इस पेपर में परीक्षार्थियों की संख्या कम थी, संभव हो कि इस दौरान प्रश्नपत्र का प्रिंट आउट निकाल लिया गया हो।
टाइपिंग की गलती से चौथे के बजाय पांचवां पेपर खुल गया था। पांचवें पेपर के प्रश्नपत्र रखे हुए थे। इसलिए परीक्षार्थियों को दूसरी पाली में परीक्षा कराने का विकल्प भी दिया गया था। बहरहाल सभी परीक्षार्थियों ने 21 दिसंबर को परीक्षा देने का विकल्प स्वीकार किया है। - संजय मेधावी, प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय