नगर निगम के जिम्मेदार तो काम में देरी को लेकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, मगर अंदरखाने चर्चा है कि देरी की वजह नगर निगम के जिम्मेदारों के बीच खींचतान है। महापौर और पार्षदों का विवाद खुलकर सामने आ चुका है। सूत्र बताते हैं कि यही वजह है कि यह तय नहीं हो पा रहा है कि कितनी लागत से काम किस वार्ड में कराए जाएं। कई विधायक और सांसद भी अपने हिसाब से काम कराने के लिए जोर लगा रहे हैं। इसके कारण जो कच्ची सूची बन रही है, वह 600 करोड़ से अधिक की हो गई है, जबकि बजट कम है। ऐसे में काम तय करने के लिए समिति बनाई गई है।
ये भी पढ़े- UP News: पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष मुकेश चंद्र शर्मा हटाए गए, एके द्विवेदी लेंगे इनकी जगह; पढ़ें अपडेट
- 64 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों, नाली, फुटपाथ का निर्माण
- 55 करोड़ की लागत से 110 वार्डों में सड़क-नाली के कार्य
- 1.50 करोड़ की लागत से तीन एंटी स्मॉगगन (वाटर स्प्रिंकलर)
- 75 लाख रुपये की लागत से जानकीपुरम सेक्टर-2 व 9 में ग्रीन बेल्ट का निर्माण
- 7 करोड़ रुपये की लागत से जमीन को सुरिक्षत करने के लिए तारबाड़ कराना
- 10 करोड़ रुपये की लागत से बैकुंठधाम पर सीएनजी शवदाह गृह का निर्माण व सुधार कार्य
- 2 करोड़ की लागत से कूड़ा निस्तारण सेंटर का निर्माण
- 30 करोड़ की लागत से पेयजल आपूर्ति सिस्टम में सुधार
नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा के अनुसार बारिश के दौरान सड़क के काम तो नहीं हो पाएंगे, लेकिन नाली के काम हो जाएंगे। कौन से काम कराए जाएं, यह समिति तय करेगी। समिति की बैठक सात मई को हुई थी, जिसकी कार्यवाही सात जून को जारी हो गई है। उसके आधार पर आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।