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बदायूं मामले पर महज लकीर पीट रहा है आयोग

Mon, 02 Jun 2014 08:44 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
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महिलाओं के हक दिलाने और उनके उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बना राज्य महिला आयोग केवल लकीर ही पीट रहा है।
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पुलिस से पूरे मामले की सूचना मांगने के बाद आयोग अब तटस्थ की भूमिका में है। जबकि 30 मई को बदायूं गई आयोग की तीन सदस्यीय टीम भी अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है।

बदायूं में दो नाबालिग बहनों के साथ पहले बलात्कार और फिर हत्या को लेकर देशभर में गुस्सा है। राज्य महिला आयोग ने भी शुरुआत में मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस से जानकारी मांगी।
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छुट्टी के चलते नहीं बन सकी रिपोर्ट

इस पर पुलिस ने आयोग को तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की जानकारी दी। हालांकि तब तक राज्य सरकार दो पुलिसकर्मियों को इनमें से बर्खास्त कर चुकी थी।

आयोग की टीम की रिपोर्ट की जानकारी करने पर पता चला कि अभी यह तैयार ही नहीं हो सकी है। इस पर आयोग की उपाध्यक्ष और तीन सदस्यीय टीम की वरिष्ठतम सदस्य जानकीपाल का कहना है कि शनिवार और रविवार को छुट्टी केचलते रिपोर्ट नहीं दी जा सकी।

सभी सदस्यों से उनकी रिपोर्ट मांगी गई है। संभावना है कि सोमवार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री शेम-शेम नारे लगाए

सूबे के महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को लेकर यूथ क्लब वेलफेयर फाउंडेशन ने रविवार को राजधानी में जीपीओ पर प्रदर्शन किया।

इस दौरान संस्था के सदस्यों ने मुख्यमंत्री की कानपुर में महिला पत्रकार के सवाल पर अशोभनीय टिप्पणी पर शेम-शेम के नारे लगाए।

संस्था के अध्यक्ष तौहीद सिद्दीकी ने कहा कि सपा सरकार के आने के बाद से ही महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। इसे रोकने के लिए सरकार को तत्काल कड़े कदम उठाने चाहिए।

वहीं युवा स्नातक बेरोजगार वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष आदर्श गुप्ता ने कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। प्रगतिशील व्यापार मंडल की बैठक में बदायूं बलात्कार व हत्याकांड की निंदा की गई।
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