यूपी विधानसभा चुनाव आते ही सभी दल महिलाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। किसी ने 40 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट देने की घोषणा की है तो कोई महिलाओं की सुरक्षा का वादा कर रहा है। जबकि एक हकीकत यह है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ से विधानसभा में महिलाओं की नुमाइंदगी बेहद कम रही है। आजादी के 75 साल में अब तक 17 बार विधानसभा चुनाव और कई बार उपचुनाव हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक राजधानी से सिर्फ आठ महिला विधायक ही निर्वाचित हुई हैं। लखनऊ की नौ विधानसभा सीटों में से चार पर आज तक महिला विधायक नहीं बनी हैं।
पहली बार विधानसभा चुनाव वर्ष 1951 में हुए थे, लेकिन जनपद की पहली महिला विधायक के लिए लखनऊ को पांच विधानसभा चुनावों तक इंतजार करना पड़ा। पहली बार लखनऊ में वर्ष 1974 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ीं एक साथ दो महिला प्रत्याशी विजयी हुईं। उस समय स्वरूप कुमारी बख्शी ने लखनऊ पूर्वी और कैलाशपति ने मलिहाबाद सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1977 में स्वरूप कुमारी बख्शी लखनऊ पूर्वी सीट पर एक बार फिर से विजयी हुईं। वर्ष 1980 के चुनाव में स्वरूप कुमारी बख्शी के साथ ही कैंट क्षेत्र से प्रेमवती तिवारी भी विजयी रहीं।
वर्ष 1985 में मलिहाबाद से कृष्णा रावत, लखनऊ पूर्व से स्वरूप कुमारी बख्शी और कैंट से प्रेमवती तिवारी विजयी रहीं। वर्ष 1989 के चुनाव में एकमात्र महिला विधायक कैंट से प्रेमवती तिवारी ही रहीं। इसके बाद अगले पांच चुनावों में एक भी महिला विधायक निर्वाचित नहीं हो सकीं। वर्ष 2012 में कैंट से कांग्रेस के टिकट पर ही एक बार फिर से रीता बहुगुणा जोशी चुनाव जीतीं। वहीं मोहनलालगंज से सपा के टिकट पर चंद्रा रावत ने विजय हासिल की। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मलिहाबाद से जयदेवी, सरोजनीनगर से स्वाति सिंह और कैंट से रीता बहुगुणा जोशी विजयी रहीं थीं।
चार सीटों पर अभी तक नहीं हुईं महिला विधायक
लखनऊ में इस समय नौ विधानसभा सीटें हैं। इनकी संख्या कम ज्यादा होती रही है। इन नौ में से अब तक पांच विधानसभा सीट- कैंट, मलिहाबाद, मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, लखनऊ पूर्वी और सरोजनीनगर सीट पर कभी न कभी महिला विधायकों की नुमाइंदगी हो चुकी है। जबकि बीकेटी, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ मध्य और लखनऊ उत्तर में अभी तक एक बार भी महिला विधायक नहीं हुई हैं।