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यूपी: सामने आई नरकंकालों के मिलने की वजह

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उन्नाव पुलिस के एक कमरे में बरामद हुए कंकाल व विसरा के नमूने पुलिस की चूक की वजह से पड़े रहे। हालांकि, अवशेष नमूनों को हटाकर जांच पूरी करने के लिए सभी जिलों में वर्ष 2010 से अभियान चलाया गया, लेकिन उन्नाव में इसका पालन नहीं हुआ, जिस वजह से यहां यह कंकाल व विसरा के नमूने बरामद हुए।
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यह खुलासा मामले की जांच कर वापस लौटे डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी ने शुक्रवार को यह जानकारी एनेक्सी के मीडिया सेंटर में खबर नवीसों को दी। उन्होंने बताया कि जिस कमरे में यह सब बरामद हुआ, उसकी जांच के लिए एक टीम बनाई गई थी।

इस टीम में एक मजिस्ट्रेट, एक डीएसपी, एक वरिष्ठ चिकित्सक, एक फोरेंसिक विशेषज्ञ और पुलिस महकमेके चीफ फार्मासिस्ट को शामिल किया गया था।
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47 बैगों में मिला सबकुछ

इस टीम ने पाया कि कमरे में कुल 47 बैग में कंकाल व हड्डियां भरी हैं और विसरा के 74 जार हैं, जिनमें से 58 पर विवरण के लेबिल चस्पा हैं। इनमें सबसे पुराना नमूना 1984 व सबसे नया 2007 का है। डीआईजी ने बताया कि जिस कमरे में यह सब रखा था, उस पर विसरा कक्ष भी दर्ज था।

आपको उन्नाव और बहराइच में मिले नरकंकालों के मिलने के बारे पता ही होगा। उन्नाव में तो महज 104 नर कंकाल मिले हैं लेकिन पुलिस लाइन बहराइच के एक कमरे में नर कंकालों का जखीरा भरा पड़ा है।

पुलिस महकमा इसे विसरा बता रहा है लेकिन इनकी हालत देखकर लगता है कि इनका पुरसाहाल नहीं है। पुलिस महकमे के अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 1950 से अब तक के लगभग 5380 मौतों के राज कमरे में दफन हैं।

बहराइच के पुलिस लाइन में एक कमरा ऐसा है, जहां पर वर्षों पुराने नर कंकाल सड़ रहे हैं। मानव अस्थियां बोरे और कपड़े में बंधी पड़ी हैं। विसरा के सैकड़ों डिब्बे भी अस्त-व्यस्त पड़े हैं। इनकी सुरक्षा को लेकर महकमा कितना संजीदा है, वह इस कमरे का ही देख कर लगाया जा सकता है। कभी कुत्ते तो कभी अन्य जानवर घुसकर मानव अवशेषों को तितर-बितर कर रहे हैं।

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