जैसी आशंका थी, वही हुआ। तमाम नसीहतों और निर्देशों के बावजूद वरुण गांधी समेत दर्जन भर भाजपा सांसद धरने में नहीं पहुंचे। गैरहाजिर रहने वाले सांसदों से राष्ट्रीय महासचिव रामशंकर कठेरिया पूछताछ करेंगे।
योगी आदित्यनाथ भी नहीं पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को इसकी जानकारी दे दी थी। वे गोरखपुर में सरकार के खिलाफ धरने में शामिल हुए।
भाजपा को भले ही लोकसभा चुनाव में भारी कामयाबी मिल गई हो लेकिन उसका पुराना रोग बरकरार है। अमित शाह की टीम से बेदखल वरुण गांधी बिना सूचना दिए गैरहाजिर रहे। वह पहले भी भाजपा के कार्यक्रमों से किनारा करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान वह अमेठी में नरेन्द्र मोदी की सभा तक में नहीं गए थे।
कभी नहीं हुआ इतना बड़ा धरना
राजधानी में इतनी बड़ी तादाद में सांसदों ने पहली बार प्रदेश सरकार के
खिलाफ धरना दिया। राजभवन में जिक्र होने पर राज्यपाल राम नाईक ने भी माना
कि सांसदों का इतना बड़ा डेलीगेशन कभी नहीं मिला।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि कुल पांच सांसदों ने उनसे धरने में शामिल न होने की अनुमति मांगी थी। केंद्र में मंत्री पद संभालने वाले सात सांसदों और उपचुनाव के प्रभारी 11 सांसदों को धरने में शामिल होने से छूट थी।
धरने में न आने वालों में बाराबंकी की प्रियंका रावत, बस्ती के हरीश द्विवेदी, बागपत के सत्यपाल सिंह, गौतमबुद्धनगर के महेश चंद शर्मा जैसे कई सांसद हैं।
धरने में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर के सांसद और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान भी पहुंचे। मंत्री होने के नाते उन्हें धरना स्थल पर न आने की सलाह दी गई। वह भाजपा मुख्यालय में थे लेकिन राज्यपाल को ज्ञापन देने वालों में वे भी शामिल थे।
योगी होंगे सीएम कैंडीडेट?
विपक्ष भले ही गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ के
विवादास्पद बयानों को लेकर भाजपा और मोदी सरकार पर आक्रामक हो, लेकिन खबर यह भी है कि उत्तर
प्रदेश की राजनीति में अब योगी आदित्यनाथ ही भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख
चेहरा होंगे।
अगर 13 सिंतबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों में
भाजपा को आशातीत सफलता मिलती है तो योगी आदित्यनाथ 2017 के विधानसभा चुनाव
में भी भाजपा का नेतृत्व कर सकते हैं और सही समय पर पार्टी उन्हें
मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित कर सकती है।
यह राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ की रणनीति है कि लोकसभा चुनावों में हुए हिंदुत्व के
ध्रुवीकरण को राज्य विधानसभा चुनावों में और मजबूती प्रदान की जाए, जिसके
लिए योगी आदित्यनाथ से बड़ा और कारगर कोई दूसरा नाम भाजपा में नहीं है।
वरुण खेमे का दावा झूठा?
वरुण गांधी को भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के पद से हटाया जाना
भले ही चौंकाने वाला रहा हो, लेकिन वरुण गांधी के कैंप में इसे लेकर
मायूसी नहीं थी और वे दावा कर रहे थे कि उन्हें कोई और बड़ी जिम्मेदारी
मिलने वाली है।
वरुण गांधी के नजदीकी लोगों का दावा था कि पार्टी के
अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दावेदार
के रूप में पेश करने का वादा किया है।
हालांकि इस बात की जानकारी
प्रदेश भाजपा को नहीं थी। प्रदेश में पार्टी प्रवक्ता डॉ। मनोज मिश्र ने
अमर उजाला से कहा, 'यह तो केंद्र का विषय है। हमारे पास इसकी कोई जानकारी
नहीं है।'