राजधानी के खुदरा बाजार में चढ़े आलू के दाम सीधे कालाबाजारी की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं तो शहर में बीते एक महीने के दौरान 15 कोल्ड स्टोरेज से बिकने के लिए निकला 13.50 लाख बोरी आलू कहां गया? क्योंकि यहां एक दिन की खपत लगभग 4000 बोरी है। यानी महीने में करीब एक लाख 20 हजार बोरी इस्तेमाल होती है। तो फिर बाकी 12 लाख 30 हजार बोरी आलू कहां गया? यही नहीं यहां रोजाना डेढ़ सौ टन यानी करीब 3000 बोरी आलू बाहर से आता ही है। इस हिसाब से तो आलू मारा-मारा फिरना चाहिए था, लेकिन स्थिति उल्टी है। महंगाई को देखते हुए सरकार की ओर से 32 रुपये प्रति किलो की दर से सस्ते में आलू बेचा जा रहा है। फिर भी खुदरा मंडी में आलू की कीमत 40 से 45 रुपये प्रति किलो है। वहीं थोक मंडी में 22 से 33 रुपए किलो के हिसाब से आलू बिक रहा है। जानकारों की मानें तो आलू की जमाखोरी चरम पर है। कई बड़े व्यवसायियों ने आलू का भंडारण कर रखा है। यही कारण है कि भारी मात्रा में बाजार के लिए उतारा गया आलू गायब है और दाम चढ़े हुए हैं।
50-50 किलो की है कोल्ड स्टोरेज से निकली बोरी
हरदोई रोड स्थित दुबग्गा मंडी के आलू आढ़ती रजी अहमद ने बताया कि जिले के किसानों ने लखनऊ के 15 कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा था। एक कोल्ड स्टोरेज की क्षमता एक लाख बोरी आलू रखने की है। एक बोरी में करीब 50 किलो आलू आता है। यही आलू बीते महीने अधिकतर निकल चुका है। इसके बाद भी आलू सस्ता नहीं हो सका। स्टोर से निकला आलू कहां चला गया? आढ़ती को भी पता नहीं है।
स्टोरेज में सिर्फ दस फीसदी आलू शेष
कोल्ड स्टोरेज से 31 अक्टूबर तक आलू निकालकर उसे खाली करने का एक्ट में प्रावधान है। इस सिलसिले में शासन ने कोई आदेश नहीं दिया है। एक्ट के चलते कोल्ड स्टोरेज से 90 फ़ीसदी आलू निकल चुका है। सिर्फ 10 फ़ीसदी बुवाई और कुछ बिक्री का अवशेष है।
- यश कुमार अध्यक्ष लखनऊ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन