लगता है जिलों की पुलिस ने पिछले महीने संभल में दो सिपाहियों की हत्या कर कैदियों के फरार होने की घटना से कोई सबक नहीं लिया। बाराबंकी में कैदी वाहन में कैदियों को ठूंसकर भरा गया था। एक गाड़ी में कुल 90 कैदी सवार थे।
गाड़ी में जगह न होने की वजह से कैदियों की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों को निजी वाहनों से जेल से अदालत तक आना पड़ा। अदालत में बनी लॉकअप भी काफी जर्जर हालत में थी, जिसका दरवाजा एक धक्के में खोला जा सकता था।
डीजीपी ओमप्रकाश सिंह के निर्देश पर जब मुल्जिम ड्यूटी और मुल्जिमों को ले जाने वाली गाड़ियां चेक की गईं तो चौंकाने वाली यह हकीकत सामने आई। शनिवार को सभी जिलों में दो-दो पुलिस उपाधीक्षकों ने कैदी वाहनों और ड्यूटी की आकस्मिक चेकिंग की। इस दौरान 25 से अधिक जिलों में खामियां मिलीं।
कहीं सुरक्षा में लगाए गए पुलिस कर्मी गायब थे तो कहीं पुलिस कर्मी की पिस्टल में कारतूस ही नहीं था। किसी गाड़ी का दरवाजा टूटा हुआ था तो कोई गाड़ी बिना बाहर से लॉक किए ही जेल से अदालत का सफर तय कर रही थी। संभल में ही कैदियों की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी की पिस्टल में मैगजीन तो थी लेकिन उसमें एक भी कारतूस नहीं था।
मुरादाबाद में कैदियों की सुरक्षा में लगाए गए तीन पुलिसकर्मी ड्यूटी से गायब मिले। इसके अलावा कई जिलों में कैदियों को लाने-ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस नहीं मिला। कई गाड़ियों का दरवाजा काफी जर्जर था। कुछ में तो बाहर से ताला भी नहीं बंद किया गया था। इन खामियों के बाद कई जिलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।