उन्होंने कहा कि ट्रेसिंग, टेस्टिंग और त्वरित ट्रीटमेंट के मंत्र से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अब तक 6 करोड़ 81 लाख 37 हजार 752 कोविड सैम्पल की जांच की जा चुकी है। विगत 24 घंटे में हुई टेस्टिंग में 27 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 63 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। प्रदेश में अब तक 16 लाख 85 हजार 555 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं। इस स्थिति को और बेहतर करने के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट की नीति के अनुरूप सभी जरूरी प्रबंध किए जाएं।
प्रदेश में कोविड टीकाकरण सुचारू रूप से चल रहा है। प्रदेश में अब तक 5.50 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है। कोविड से बचाव के लिए टीका-कवर अति उपयोगी है। कोविड के खिलाफ अब की लड़ाई में टीके की महत्ता स्वयं सिद्ध है। इसके दृष्टिगत, उत्तर प्रदेश एक मात्र राज्य है, जहां अब तक 05 करोड़ 50 लाख 52 हजार से अधिक वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी हैं। 04 करोड़ 64 लाख 33 हजार से अधिक लोगों ने वैक्सीन की एक डोज प्राप्त कर ली है।
प्रदेश में अब तक 86 लाख से अधिक लोग कोविड टीके की दोनों डोज प्राप्त कर चुके हैं। इस स्थिति को और बेहतर करने की आवश्यकता है। कोविड टीके की दूसरी खुराक समय पर मिलना सुनिश्चित कराया जाए। जिन लोगों को दूसरी डोज लगाई जानी है, उनसे संवाद-संपर्क किया जाए। शनिवार का दिन सेकेंड डोज के लिए आरक्षित रखें। बौद्ध-भिक्षु गणों, विदेशी नागरिकों व असहाय व निराश्रित जनों के टीकाकरण के लिए भी समुचित व्यवस्था की जाए।
स्वतंत्रता दिवस के उपरांत माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक और व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में भौतिक रूप से पठन-पाठन प्रारंभ हो रहा है। इसके दृष्टिगत, 18 वर्ष से अधिक विद्यार्थियों के टीकाकरण के लिए विश्वविद्यालय, स्कूल व कॉलेज परिसर में ही टीकाकरण शिविर लगाए जाएं। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षकों व कार्मिकों की उपस्थिति हो रही है। आवश्यकतानुसार इन विद्यालय परिसरों में भी टीकाकरण शिविर आयोजित किए जाएं।
राज्य स्तरीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाहकार समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप स्वाधीनता दिवस के उपरांत माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक और व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में 50 फीसदी क्षमता के साथ भौतिक रूप से पठन-पाठन प्रारंभ किया जाए। सभी जगह कक्षाएं दो पाली में चलें। कोविड प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जाए।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कक्षा 06 से 08 वीं तक की कक्षाओं में नवीन प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाए। स्थिति का आकलन करते हुए इन विद्यालयों में एक सितंबर से पठन-पाठन शुरू किया जा सकता है।