समाजवादी पार्टी ने 2012 के विधानसभा चुनाव में जनता से वादा किया था कि वह बसपा राज के भ्रष्टाचार की जांच कराकर दोषियों को जेल भेजवाएगी।
लेकिन जब मौका मनरेगा की जांच व कार्रवाई का आया तो आरोपियों को बचाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
अब सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार के मुंह की खाने के बाद समाजवादी सरकार सवालों में घिर गई है। मनरेगा में भ्रष्टाचार का खुलासा बसपा राज में ही हो गया था।
कांग्रेस नेता शुरू से ही गोंडा, बलरामपुर व सोनभद्र सहित सात जिलों के भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते रहे।
मगर बसपा सरकार लगातार अनसुना करती रही तो सपा ने इसे विधानसभा चुनाव में मुद्दा बना डाला। मगर जब खुद की हुकूमत आई और कुछ अपने भी फंसते नजर आए तो सरकार ने यू-टर्न ले लिया।
यही नहीं सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देश पर जो ईओडब्ल्यू जांच शुरू कराई, उससे वह कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सकी।
केंद्र की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश लगातार सीबीआई जांच के लिए सीएम से कहते रहे, मगर सरकार जांच से दो टूक इन्कार करती रही।
लेकिन जब एक पीआईएल पर हाईकोर्ट ने सात जिलों के भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच और बाकी जिलों के प्रारंभिक जांच का आदेश दिया तो सरकार छटपटा गई।
सब कुछ साफ-साफ नजर आने के बावजूद सरकार मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोपी कुछ खास अफसरों को बचाने के लिए सीबीआई जांच का हाईकोर्ट के आदेश निरस्त कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
लेकिन वहां अपील खारिज होने के बाद सात जिलों के भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच और बाकी 68 जिलों के भ्रष्टाचार की प्रारंभिक जांच का भी रास्ता साफ हो गया है।
पंधारी सहित 100 से ज्यादा अफसर करेंगे जांच का सामना
सीबीआई जांच जिन सात जिलों में होनी है, उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से हटाए गए सचिव पंधारी यादव सहित 100 से ज्यादा अफसर शामिल हैं।
हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच का आदेश देने के बाद जब सीबीआई ने मनरेगा घोटाले की जांच को लेकर एफआईआर दर्ज करानी शुरू की तो सरकार ने पंधारी यादव को हटाकर सचिव नगर विकास बना दिया।
11,000 करोड़ के काम सीबीआई जांच के दायरे में
सीबीआई जांच के दायरे में 11 हजार करोड़ रुपये की मनरेगा के काम होंगे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच तत्काल शुरू कराने का आग्रह किया था।
उस पत्र में बताया गया है कि 2006-07 से अब तक करीब 25,000 करोड़ रुपये प्रदेश को मनरेगा के तहत मिले हैं।
हाई कोर्ट ने 31 जनवरी को सात जिलों में 2007-08 से 2009-10 के बीच मनरेगा से हुए काम में धांधली की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
साथ ही अभियोजन की कार्यवाही व अन्य जिलों में प्राथमिक जांच कराकर, आवश्यक होने पर नियमित जांच कराने को कहा है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार केंद्र ने 2007-08 से 2009-10 के बीच यूपी को 11 हजार करोड़ रुपये जारी किए हैं।