फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दांव पर राजनाथ की प्रतिष्ठा, सपा-कांग्रेस ने की घेराबंदी

Sat, 13 Sep 2014 05:24 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ पूरब सीट पर भाजपा और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां सपा-कांग्रेस ने भाजपा के लिए मजबूत घेरे बंदी की है।
विज्ञापन


केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के इस्तीफे से खाली हुई, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र की लखनऊ पूरब विधानसभा सीट पर शनिवार को होने वाले उपचुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

भाजपा ने इस सीट पर पूर्व सांसद लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन उर्फ गोपालजी को प्रत्याशी बनाया है। उन्हें सपा की जूही सिंह और कांग्रेस के रमेश श्रीवास्तव से कड़ी टक्कर मिल रही है।
विज्ञापन


बसपा के समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे पूर्व एमएलसी शिवपाल सिंह पर भी नजरें टिकी हुई हैं। नए परिसीमन के बाद लखनऊ पूरब विधानसभा सीट का यह दूसरा चुनाव हो रहा है।
Trending Videos

यहां राजनाथ ने लहराया जीत का झंडा

वर्ष 2012 में इस सीट पर 68,276 वोट लेकर कलराज मिश्र विजयी रहे थे। उनके मुकाबले सपा की जूही सिंह को 47,908 और कांग्रेस के रमेश श्रीवास्तव को 35,227 वोट मिले थे।

चौथे नंबर पर रहे बसपा के केसी त्रिपाठी को 28,080 मत प्राप्त हुए थे। सपा और कांग्रेस ने पुराने प्रत्याशियों पर ही दांव लगाया है जबकि बसपा चुनाव मैदान में नहीं हैं।

उसने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे शिवपाल सिंह (एसपी सिंह) को समर्थन दिया है। लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की तस्वीर काफी हद तक बदली हुई थी।

लखनऊ पूरब विधानसभा क्षेत्र में राजनाथ सिंह ने 1,47,654 वोट पाकर कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी पर एक लाख से ज्यादा मतों से बढ़त हासिल की थी। रीता को 45,094 वोट मिले थे। सपा और बसपा बहुत पीछे रह गए थे।

बेटे को जिताने की चुनौती

भाजपा पिछले दो चुनावों में इस सीट पर अच्छी बढ़त हासिल करती रही है। इस बार पूर्व मंत्री लालजी टंडन के सामने अपने बेटे को जिताने की चुनौती है। यह चुनौती इसलिए भी बढ़ी हुई है कि आशुतोष 2012 का विधानसभा चुनाव हार गए थे और भाजपा ने वर्ष 2014 में लालजी टंडन का टिकट काटकर राजनाथ सिंह को प्रत्याशी बनाया था।

लालजी टंडन पर अब कलराज और राजनाथ को विजय दिला चुकी लखनऊ पूरब सीट पर भाजपा का परचम फहराने की जिम्मेदारी है। आशुतोष को मिलने वाले वोटों को टंडन के कद से भी जोड़कर देखा जाएगा। इसलिए उनके सामने अपनी साख को बचाए रखने की चुनौती है।

सपा ने जूही सिंह को मैदान में उतारकर भाजपा की घेराबंदी करने की कोशिश की है। सबसे पहले प्रत्याशी घोषित हो जाने की वजह से जूही सिंह ज्यादातर इलाकों में वोटरों से रूबरू हो चुकी हैं। प्रदेश सरकार के कई मंत्री उनके चुनाव की कमान संभाले हुए हैं। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है।

इसके बावजूद उनके सामने पिछले दो चुनावों में भाजपा का गढ़ बने लखनऊ पूरब में जीत हासिल करने की चुनौती है। कांग्रेस भी इस सीट पर पूरी ताकत झोंक रही है। उसके प्रत्याशी रमेश श्रीवास्तव इस इलाके से लंबे समय से जुड़े हैं। उनका चुनावी कौशल दांव पर है कि वह कांग्रेस का खाता खोल पाते हैं या नहीं।

मतदान बढ़ाना बड़ी चुनौती

लखनऊ पूरब सीट पर वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले तक सभी प्रत्याशियों के सामने वोटरों को बूथों तक लाने की चुनौती है। न तो विधानसभा चुनाव 2012 जैसा माहौल है और न ही आम चुनाव 2014 जैसा।

आम मतदाताओं पर चुनाव का रंग चढ़ा नहीं दिख रहा है। सभी दल मतदान प्रतिशत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 54.3 फीसदी और 2014 के लोकसभा चुनाव में 56.10 फीसदी वोट पड़े थे। राजनीति के जानकार मानते हैं कि पिछले चुनावों में वोटिंग परसेंटेज बढ़ने का लाभ भाजपा को मिलता रहा है और वोटिंग गिरने का लाभ उनके विरोधियों को।

मतदान की पूर्व संध्या पर मौसम के मिजाज ने सभी प्रत्याशियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। माना जा रहा है जो दल वोटरों को ज्यादा तादाद में बूथों तक ले आएगा, इसकी जीत का संभावना बढ़ जाएगी।

एसपी सिंह फैक्टर पर नजरें
निर्दलीय एसपी सिंह को बसपा समर्थन दे रही है। उनके प्रचार में बड़ी टीम लगी है। वह कुर्मी बिरादरी से हैं जिनके वोटों की तादाद भी ठीकठाक है। यदि वह दलित-पिछड़े और अन्य वोटों का एक हिस्सा लेने में कामयाब रहते हैं तो चुनाव में चौथा कोण बन सकते हैं।
विज्ञापन

दिग्गजों ने नहीं किया प्रचार

लखनऊ पूरब सीट पर सभी दलों के दिग्गज प्रचार से दूर रहे। सपा के पक्ष में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कोई सभा नहीं की।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी अपने संसदीय क्षेत्र की सीट पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार को नहीं आए। इस सीट पर कलराज मिश्र के इस्तीफे से उपचुनाव हो रहा है लेकिन वह भी केवल एक ही दिन यहां आ पाए।

कांग्रेस का भी कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता प्रचार के लिए नहीं आया। बड़े नेताओं के न आने से भी आम लोगों पर चुनावी रंग नहीं चढ़ पाया।

ये इलाके हैं लखनऊ पूरब सीट में:
गोमतीनगर, इंदिरा नगर, निशातगंज, महानगर, कल्याणपुर, आदिल नगर, फरीदी नगर, शक्तिनगर, न्यू हैदराबाद, पेपर मिल कालोनी, बादशाहपुर नगर, विकास नगर, खुर्रम नगर, रहीम नगर, सर्वोदय नगर, हरिहर नहर, पटेल नगर आदि।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें