सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का दुर्ग कहे जाने वाले मध्य यूपी और अवध के 12 जिलों में रविवार को तीसरे चरण में 69 सीटों पर मतदान होगा। सपा के सामने जहां अपने ही गढ़ में पुरानी हैसियत बरकरार रखने की कड़ी चुनौती है, वहीं प्रदेश की सत्ता में दावेदारी के लिए भाजपा व बसपा यहां ताकत बढ़ाने की जद्दोजहद में हैं। इस चरण में सपा सुप्रीमो व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी परीक्षा है।
तीसरा चरण सपा, बसपा और भाजपा तीनों के लिए ही बेहद अहम है। इस चरण के जिलों में 2012 के चुनाव में सपा को 80 फीसदी सीटों पर कामयाबी मिली थी। इस बार मुलायम इस क्षेत्र की चुनावी जंग से दूर हैं।
वह जसवंतनगर (इटावा) और लखनऊ (कैंट) के अलावा किसी अन्य सीट पर चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए। यह पहला मौका है जब अखिलेश यादव की अगुवाई में सपा अपने संस्थापक अध्यक्ष के बिना चुनावी संग्राम लड़ रही है।
उसके सामने 2012 में जीती गई 55 सीटों को बचाने के साथ ही नई सीटों पर जीत हासिल करने की चुनौती है तो भाजपा व बसपा यहां भगवा और नीला रंग चढ़ाने के लिए जी-जीन से जुटी हैं।
पांच और छह सीटों तक ही सीमित रह गई थी भाजपा व बसपा
पिछली बार इन दोनों दलों को क्रमश: 5 और 6 सीटें ही मिल पाई थीं। अधिकतर जिलों में उनका खाता नहीं खुला था। रविवार के मतदान से तय होगा कि कि यादव पट्टी में भगवा और नीला रंग कितना चढ़ पाता है?
सपा को बगावत, भितरघात से खतरा
तीसरे चरण में सीतापुर से इटावा तक कई जिलों में सपा को अपनों की बगावत और भितरघात से खतरा बना हुआ है। मुलायम के गृहजिले इटावा और आसपास के जिलों में यह साफ तौर पर दिखता भी है।
इटावा सदर के विधायक रघुराज शाक्य बागी तेवर अख्तियार कर चुके हैं। भरथना की विधायक सुखदेवी वर्मा भी लगभग उसी रास्ते पर हैं।
सीतापुर में विधायक रामपाल यादव और महेंद्र सिंह उर्फ झीन बाबू चुनौती बने हुए हैं। मैनपुरी में भी सपा की अंदरूनी राजनीति का असर देखने को मिल रहा है।
शिवपाल के लिए अहम है जीत का अंतर
शिवपाल यादव
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शिवपाल सिंह यादव अभी तक जसंवतनगर के चुनाव तक सीमित हैं। वे बड़े मार्जिन से जीत हासिल करके यादव बेसिन में अपने दबदबे का संदेश देना चाहते हैं। उनकी चुनावी सभाओं में मुलायम ने पहुंचकर यह जताने की कोशिश की है कि पूरे विवाद में उनका समर्थन शिवपाल के साथ है।
जसवंतनगर में शिवपाल खेमा नाम लिए बिना रामगोपाल यादव पर चुनाव में साजिश करने का आरोप लगा रहा है। यानी परिवार में अब भी सब कुछ ठीक नहीं है। वहीं, सपा को शिवपाल खेमे से भितरघात का अंदेशा है। शायद इसीलिए सीएम अखिलेश यादव ने इटावा की सभा में इशारों ही इशारों में शिवपाल पर तीखा हमला किया।
रामगोपाल का भी लिटमस टेस्ट
तीसरे चरण के यादव बहुल जिलों में सपा महासचिव रामगोपाल यादव का भी लिटमस टेस्ट होगा। यहां चुनाव की कमान खुद रामगोपाल ने संभाल रखी है।
मैनपुरी, इटावा, औरैया के चुनाव को उनकी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। यहां प्रत्याशियों का चयन भी उनकी पसंद से हुआ है। मुलायम व शिवपाल के नजदीकी विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं। पिछली बार इन तीनों जिलों की सभी सीटें सपा के खाते में गई थीं।
ये बिंदु भी है बेहद महत्वपूर्ण
मुलायम सिंह के साथ शिवपाल यादव
पहले व दूसरे चरण में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के विपरीत तीसरे चरण में यादव, शाक्य, लोधी, राजपूत और ब्राह्मणों की अहम भूमिका होगी। भाजपा व बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर जातीय गोलबंदी की है। प्रदेश में सत्ता की दावेदारी बनाए रखने के लिए दोनों दलों ने तीसरे चरण के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।