prashant and his wife vivek tiwari murder
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पिछले साल 28 सितंबर को हुए राजधानी के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड की मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट देर रात जिलाधिकारी को सौंपी गयी। जांच में विवेक द्वारा एक्सयूवी गाड़ी को सिपाही प्रशांत की बाइक पर चढ़ाने की बात झूठी साबित हुई। जब सिपाही प्रशांत ने फायरिंग की तब वह गिरी हुई मोटरसाइकिल के पीछे खड़ा था। वहीं विवेक द्वारा एक्सयूवी कार को किनारे से निकालने का प्रयास किया जा रहा था। यानी कार की दिशा बाइक की दिशा के विपरीत नहीं थी। बाइक भी ऐसी अवस्था में नहीं मिली, जिसे देखकर यह कहा जाता कि इस पर कार चढ़ी होगी या चढ़ाने की कोशिश की गई होगी। इस लिए आरोपी सिपाही द्वारा अपने बचाव में आत्मरक्षा में गोली चलाने की दलील झूठी होने से बर्खास्त सिपाही को ही सीधे तौर पर हत्या का दोषी साबित होता है।
करीब साढ़े चार माह तक हुई इस मजिस्ट्रेटी जांच में धटना से जुड़े हर छोटे बड़े पहलू को बारीकी से परखने के बाद विवेक तिवारी की हत्या के लिए एसआईटी जांच की तरह ही सीधे तौर पर बर्खास्त सिपाही प्रशांत को आत्मरक्षा में गोली न चला कर हत्या करने का दोषी पाया गया। इस दौरान मौजूद साथी सिपाही संदीप कुमार द्वारा भी साथी महिला मित्र से मारपीट की गयी और उसकी तरफ से घटना को रोकने जैसी की कोशिश जांच में नसामने नहीं आयी। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने देर शाम जांच अधिकारी व एसीएम चतुर्थ सलिल पटेल द्वारा विवेक हत्याकांड की जांच रिपोर्ट सौंपे जाने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि इसे कार्रवाई की संस्तुति के साथ ही एसएसपी को सौप दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि मजिस्ट्रेटी जांच में घटना के बाद पुलिस द्वारा शुरुआती दौर में की गयी कार्रवाई के दौरान बरती गयी लापरवाही भी सामने आयी है। 28 सितंबर 2018 को एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की देर रात गोमती नगर इलाके में गोली मारकर हत्या की गयी थी। घटना से उपजे जनआक्रोश के बाद जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने इससे जुड़े सभी पहलूओं को सामने लाने के लिए हत्याकांड की मजिस्ट्रेटी जांच का निर्देश देते हुए जांच की जिम्मेदारी अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ सलिल पटेल को सौंपी थी। करीब साढ़े चार माह तक चली मजिस्ट्रेटी जांच में घटना स्थल से मिले साक्ष्य, पुलिस द्वारा की गयी तफ्शीश घटना से जुड़े लोगों के दर्ज बयानों के आधार पर डीएम को सौंपी गयी रिपोर्ट में विवेक की हत्या का दोषी बर्खास्त आरक्षी प्रशांत चौधरी को पाया गया। जांच रिपोर्ट में घटना स्थल के आसपास से जुड़ी सीसीटीवी फुटे और पुलिस टीम द्वारा किए गए रीक्रिएशन के आधार पर पाया गया कि पूरी घटना को बर्खास्त सिपाही ने आत्मरक्षा में नहीं वरन सोच समझ कर ही गोली चलायी थी।