मंदिर निर्माण को लेकर लोगों में उत्सुकता को देखते हुए विहिप सचेत हो गई है। उसकी कोशिश है कि निर्माण के दौरान अयोध्या आने वालों लोगों की भीड़ नियंत्रित रहे। ऐसा न हो कि शुरुआती दिनों में तो अयोध्या में बहुत भीड़ आ जाए और बाद में सन्नाटा छा जाए। इसीलिए विहिप की योजना जिला, क्षेत्र और प्रांतवार संख्या तय करके लोगों को अलग-अलग दिन बुलाने की है।
योजना है कि 1990 और 92 की तरह ही अलग-अलग क्षेत्रों की संख्या तय करके लोगों को बुलाया जाए। दिल्ली बैठक में मंदिर निर्माण के दौरान अयोध्या भेजे जाने वाले कारसेवकों की क्षेत्रवार संख्या और तरीका व तारीखों पर भी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
देशभर में उन कार्यक्रमों का भी खाका खींचा जाएगा जिनसे अयोध्या के मंदिर निर्माण का उत्साह गांव-गांव बना रहे।
मंदिर आंदोलन से शुरू से जुड़े रहे और विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री अंबरीष कहते हैं कि अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक होगा। इसके निर्माण में विहिप की भूमिका वैसी ही है, जैसी भगवान राम के साथ कोल-भीलों और वानर-भालुओं की थी।
जैसे वे जामवंत और सुग्रीव जैसे सेनापतियों के निर्देश पर काम करते थे, वैसे ही विहिप कार्यकर्ता संतों के निर्देश पर मंदिर आंदोलन में काम करते रहे हैं।
अब जब मंदिर निर्माण की घड़ी सामने आ गई है, तो सेवक के रूप में हमारी भूमिका बढ़ गई है। दिल्ली बैठक में संगठनात्मक मुद्दों के साथ इस पर भी विचार होगा।