विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में घटती भीड़ ने संगठन के नेताओं को अंतत: छवि दुरुस्त करने की चिंता के लिए मजबूर कर दिया है। यही वजह है कि दलितों व पिछड़ों को जोड़ने का अभियान चलाने के साथ इन्हें संगठन में 50 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी देने का भी फैसला किया गया है।
आम तौर पर सदस्यता अभियान जैसी योजनाओं से परहेज रखने वाली विहिप ने 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में ‘हित चिंतक’ नाम से लोगों को जोड़ने की मुहिम चलाने की योजना तय की है।
इस काम के पूरा हो जाने के बाद संगठनात्मक पुनर्गठन का काम शुरू किया जाएगा। इसमें सामाजिक समरसता पर विशेष जोर रहेगा। साथ ही आयोजक समूह गठित करके जनवरी-फरवरी में पूरे प्रदेश में छोटे-छोटे सम्मेलन किए जाएंगे।
इनमें आसपास के दलित व पिछड़े समाज के ही ज्यादातर लोगों को बुलाने की योजना है। सम्मेलनों का मुद्दा भी ‘हिंदुओं की एकजुटता’ होगा।