प्रदेश सरकार ने सूबे के ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों को अब लैपटॉप और स्मार्टफोन देने का फैसला किया है। पहले इन्हें टैबलेट देने का प्रस्ताव था। शासन ने लैपटॉप व स्मार्टफोन खरीदने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक कर्मियों को ये गैजेट्स मिल जाएंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2015-16 के बजट में पंचायतीराज विभाग में कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों (वीपीओ) और ग्राम्य विकास विभाग में काम करने वाले ग्राम विकास अधिकारियों (वीडीओ) को टैबलेट देने का एलान किया था।
मगर, चतुर्थ राज्य वित्त आयोग और केंद्र सरकार के 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों में पंचायतों की बैठक से लेकर निर्माण कार्य और रिपोर्ट्स को जिस तरह आमजन की पहुंच में लाने की कल्पना की गई है, उसके मद्देनजर इन कर्मियों को इससे बेहतर संसाधनों से लैस करने पर विचार किया जा रहा था।
पंचायतीराज निदेशक उदयवीर सिंह यादव ने बताया कि पंचायतों के बेहतर कामकाज के लिए टैबलेट की जगह लैपटॉप और स्मार्टफोन देने का फैसला हुआ है। ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी, दोनों ही ग्राम पंचायतों के सचिव का काम करते हैं।
लिहाजा दोनों ही संवर्ग के इन कर्मियों को लैपटॉप व स्मार्टफोन दिए जाएंगे। दोनों संवर्गों के करीब आठ हजार कर्मी वर्तमान में कार्यरत हैं। यादव ने बताया कि राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान के तहत लैपटॉप तथा आईटी डिपार्टमेंट की ई-डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत स्मार्टफोन दिए जाएंगे।
लैपटॉप व स्मार्टफोन मिलने से न सिर्फ खुली बैठकों की मनमानी रिपोर्टिंग रुकेगी, बल्कि उन्हें बैठक की सूचना, वहां उपस्थित लोग और उसमें हुए विचार-विमर्श और लिए गए निर्णय की पूरी वीडियो रिपोर्ट तैयार करनी होगी।