सुबह-सुबह काशी के सबसे प्रतिष्ठित दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां चढ़ते हुए रामपूजन शुक्ला कहते हैं कि मोदी ने अपने पदार्पण के साथ न केवल धर्म प्रधान नगरी काशी के मर्म को झकझोरा बल्कि बदहाली के शिकार शहर में विकास की उम्मीद भी बढ़ाई। माहौल बन गया।
अब तो बहस इस बात पर है उनको टक्कर कौन देगा और किस एजेंडे के साथ।
धार्मिक कर्मकांड व ज्योतिष का काम करने वाले शुक्ला तीन महीने पहले मोदी की काशी में हुई रैली का हवाला देते हुए कहते हैं कि उन्होंने गंगा, बनारसी साड़ी और सड़कों की दुर्दशा का जिक्र कर काशी को झकझोर दिया था।
मोदी पर हो रहा है लोगों का विश्वास
लोगों का कहना है कि गुजरात में विकास करके दिखाया है इसलिए उनकी बातों पर भरोसा बढ़ रहा है।
वह कहते हैं कि शहर में तीन लाख मुसलमान हैं और कुछ जातियां ऐसी हैं जिनका मिजाज भाजपा से मेल नहीं खाता। अगर कोई इन ताकतों को गोलबंद कर ले तो मोदी से भिड़ंत हो भी सकती है, हालांकि यह आसान भी नहीं।
आज काशी के गली-मोहल्लों में होने वाली बतरसिया मीटिंग में मोदी के चुनाव हारने की बात कम ही आती है। ज्यादा जिक्र इस बात का होता है कि मोदी के खिलाफ मुख्य मुकाबले में कौन होगा केजरीवाल या अजय राय।
मोदी के पक्ष में कुछ ऐसे लोग भी खड़े मिल जाते हैं जिनकी भाजपा में न कोई दिलचस्पी रहती है न कोई बैर।
मतदाता का स्वार्थ
द स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सेक्रेटरी राजेश भाटिया कहते हैं कि हम किसी दल से जुड़े नहीं हैं।
भाजपा की ताकत बढ़ाने के पीछे हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि अगर मोदी पीएम हो गए तो पीएम का निर्वाचन क्षेत्र होने के नाते कम से कम 24 घंटे बिजली तो मिलेगी।
सिर्फ बिजली की समस्या सुधरने से हमारा कारोबार कई गुना उछाल ले लेगा।
स्थानीय बनाम बाहरी
मोदी व केजरीवाल को बाहरी व खुद को हर दुख-सुख में भागीदार बताकर कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय अपना ग्राफ बढ़ाने की कोशिश में हैं।
बात कहीं-कहीं जमीन भी पकड़ रही है क्योंकि पिछले सालों में वह बनारस के किसी अच्छे-बुरे वाकये से तटस्थ नहीं रहे। उनका नेटवर्क भी अच्छा है।
भाजपा अपना रही ये रणनीति
मोदी खेमे की कवायद इस बात को लेकर है कि कैसे उनकी जीत को ऐतिहासिक बनाया जाए।
स्थानीय लोगों को बूथ प्रबंधन में लगाया गया है तो गुजरात के कारोबारियों व मुसलमानों के जरिये मोदी और गुजरात के विकास की उजली तस्वीर पेश करवाकर माहौल बनाने की कोशिशें जारी हैं।
मसलन भूमिहार (कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय की जाति) मतों में सेंध लगाने के लिए भाजपा नेता स्वर्गीय कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय से लेकर बिहार के भूमिहार नेता सीपी ठाकुर को सक्रिय किया गया है।
ग्लैमर का तड़का देने के लिए अंतिम दौर में हेमामालिनी व भोजपुरी फिल्मों के स्टार मनोज तिवारी के कार्यक्रम की योजना है।
मुसलमानों को लेकर मोदी के मैनेजर भी सक्रिय
तीन लाख से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के बीच पहुंचने को भाजपा भी लालायित दिख रही है।
मोदी के मैनेजरों ने बड़े मुस्लिम साड़ी कारोबारियों के मोहल्ले मदनपुरा में मोदी की एक सभा कराने को लेकर इलाके के कई रसूखदार लोगों से संपर्क साधा है।
मोदी के पक्ष में बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में आने वाले जमीयत उलमा हिंद के नेता महमूद मदनी भी एकाध दिन में बनारस आने वाले हैं।
दमखम से जुटी आप
अरविंद केजरीवाल के बनारस में डेरा डालने के बाद आप की सक्रियता शहर में बढ़ी है।
माहौल बनाने के लिए कई टोटकों का सहारा भी लिया। अपने गंगा स्नान को भुनाने के साथ, किसी होटल के बजाय संकटमोचन मंदिर के गेस्ट हाउस में कुछ दिन ठिकाना बनाकर एक खास संदेश इस हिंदू धार्मिकता वाले शहर को देने की कोशिश की।
करीब 300 समर्थक वालंटियर्स ने बाहर से आकर शहर में डेरा डाल दिया है। ज्यादा जोर डोर-टू-डोर कैम्पेन पर है।
दिल्ली से आई एक वालंटियर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि कुछ घरों में पुरुषों ने मोदी का नाम लेकर हाथ जोड़ लिया पर उन्हीं घर की महिलाओं ने दखल देकर न केवल घर के अंदर बुलाया बल्कि चाय-पानी को भी पूछा।
तेजी से बदलती परिस्थितियां
दरअसल पहले अधिकतर मुसलमान केजरीवाल के पक्ष में खड़े दिख रहे थे, पर कौमी एकता दल के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद से स्थितियां कुछ बदली हैं। अब अंसारी समर्थक अजय राय की वकालत करने लगे हैं।
मुसलमानों की पैरोकार समाजवादी पार्टी और सोशल इंजीनियरिंग के सहारे बसपा के प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन वोटरों पर अभी तक कोई प्रभावी छाप नहीं छोड़ सके हैं।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मुसलमानों ने केजरीवाल पर पहले दिन से भरोसा जता दिया है। इस बार हांका लगाने से मुस्लिम वोट नहीं मिलने वाला।
ये रहे प्रत्याशी
कैलाश चौरसिया (सपा)
मिर्जापुर के रहने वाले, वहीं से विधायक। अखिलेश सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री। विरोधियों के मुकाबले कम चर्चित होने के नाते पार्टी का काडर भी करो या मरो के भाव के साथ नहीं लगा।
अरविंद केजरीवाल(आप)
पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री। भ्रष्टाचार व सांप्रदायिकता के सवाल पर भाजपा व कांग्रेस दोनों को कठघरे में खड़ा कर माहौल बनाने की कोशिश। डोर-टू-डोर प्रचार पर ज्यादा भरोसा। दिल्ली व अन्य राज्यों के वालंटियर्स 15 दिनों से सक्रिय।
अजय राय (कांग्रेस)
पांच बार के विधायक। पिछला लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा था। मोदी व केजरीवाल को बाहरी बताकर स्थानीय को मुद्दा बनाने की कोशिश। पार्टी से ज्यादा अपने खुद के नेटवर्क पर भरोसा। धुर विरोधी अंसारी बंधुओं का समर्थन हासिल कर कौशल दिखाया।
भाजपा और बसपा के प्रत्याशी
नरेंद्र मोदी (भाजपा)
गुजरात के मुख्यमंत्री। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार। नरम हिंदुत्व व विकास के गुजरात मॉडल के साथ रण जीतनेे की कोशिश।
जीत को ऐतिहासिक बनाने के मकसद से हर तबके को अपने पाले में खींचने के लिए अलग-अलग रणनीति का सहारा। हर तबके में सेंध की कोशिश।
विजय प्रकाश (बसपा)
शहर के कारोबारी। पिछला चुनाव अपना दल से लड़ा था। चुनाव प्रचार को आक्रामक नहीं बना पाए। प्रचार में पार्टी काडर व कुछ सजातीय बंधुओं के अलावा किसी अन्य की सक्रियता नजर नहीं आ रही है।