नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना व सीएम योगी
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आम बजट में मिली रकम खर्च करने के लिए अभी चार महीने (अप्रैल से जुलाई) भी नहीं बीते और सरकार अनुपूरक ले आई। सवाल उठाया जा रहा है कि इतनी जल्दी अनुपूरक बजट लाने की आवश्यकता कैसे पड़ गई? वित्त विभाग के अधिकारी इसके लिए कई वजहें गिना रहे हैं।
- पहला, लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश के कर्मचारियों को नई पेंशन की विसंगतियां दूर करने का आश्वासन दिया गया था। सरकार ने पेंशन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का आश्वासन दिया था। इसके लिए बड़े बजट की दरकार थी जिसे विभागीय बचतों से पूरा किया जाना संभव नहीं था।
- दूसरा, मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुंभ में देश के सबसे बड़े लंबे एक्सप्रेस-वे बनाने का एलान किया था। सीमित संसाधनों की वजह से सरकार आम बजट में इसके लिए एलान नहीं कर पाई थी। जिन एक्सप्रेस-वे पर पहले से काम चल रहा है, उनके लिए अतिरिक्त पैसे की जरूरत थी।
- तीसरा, प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं व संगिनियों का मानदेय बढ़ाने का एलान किया था। मगर, अतिरिक्त बजट की व्यवस्था न होने से भुगतान नहीं हो पा रहा था। 1.55 लाख आशा कार्यकर्ताओं का यह समूह सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाने लगा था।
- चौथा, सरकार ने अपने आकस्मिक खर्चों के लिए राज्य आकस्मिकता निधि से रकम लेकर खर्च की थी जिसे जल्द से जल्द प्रतिपूर्ति की जानी है।
- पांचवां, सरकार ने सात शहरों को अपने खजाने से स्मार्ट सिटी बनाने और 14 जिला चिकित्सालयों को राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाने का एलान कर अनुपूरक बजट को छोटे आम बजट की तरह डिजाइन कर आम लोगों को आकर्षित करने का काम किया है।