उत्तर प्रदेश सरकार मक्का और आलू खेती के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास में जुटी हुई है। इसके लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भंडारण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और बिक्री को आसान और बेहतर बनाया जाएगा।
इस परियोजना में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ मिलकर काम किया जाएगा। महिला किसानों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। उन्हें उन्नत बीज, कृषि मशीनरी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, बीमा और पारदर्शी मूल्य तय करने वाली प्रणाली जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। फसल कटाई के बाद उत्पाद खराब न हों, इसके लिए कोल्ड चेन, स्टोरेज और ग्रेडिंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी।
प्रदेश सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और प्रदेशवासियों को विषमुक्त अन्न, दूध, फल व सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत एक करोड़ से अधिक किसानों को गो आधारित खेती से जोड़कर न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई जाएगी, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में भी क्रांतिकारी बदलाव किए जाएंगे।
प्रदेश के गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहली बार प्रदेश में गांव-गांव अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इस अभियान के माध्यम से करीब एक करोड़ से अधिक किसान परिवारों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। किसानों को गो आधारित खेती से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, संसाधन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्राम-ऊर्जा मॉडल को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की आधारशिला के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस मॉडल के अंतर्गत हर गांव में गोशालाओं के माध्यम से बायोगैस, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत आदि का उत्पादन कर खेतों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों की रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी।