प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना को मंजूरी दे दी है। इसकेतहत पारंपरिक कारीगरों व दस्तकारों को उद्यम के आधार पर कौशल विकास के लिए छह दिनी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की इस योजना में प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह नि:शुल्क व आवासीय होगा। तहसील अथवा जिला मुख्यालय पर प्रशिक्षण होगा। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को श्रम विभाग तय अर्धकुशल मजदूरी की दर से मानदेय भी देगा।
खान-पान की सुविधा भी नि:शुल्क दी जाएगी। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची जैसे पारंपरिक स्वरोजगारियों तथा हस्तशिल्प को प्रोत्साहन व संवर्धन के लिए सरकार यह योजना ला रही है।
प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र सहित ट्रेडवार उन्नत किस्म की टूल भी दी जाएगी। इससे पारंपरिक स्वरोजगारियों व हस्तशिल्पियों को अधिक से अधिक रोजगार के मौके मिलेंगे। इस फैसले से प्रति वर्ष 15 हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। वर्ष 2018-19 के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।