यूपी में बजट सत्र के दूसरे दिन विधान परिषद में विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर जबरदस्त हंगामा किया और सरकार को इस मुद्दे पर फेल करार दिया।
बसपा ने रायबरेली के अप्टा गांव में पांच नौजवानों की सामूहिक हत्या के दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की। बसपा ने कहा कि इस मामले में सरकार के मंत्री ही विरोधाभाषी बयान दे रहे हैं। इसलिए प्रदेश की कोई भी एजेंसी इस घटना की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती।
बसपा विधानमंडल दल के नेता सुनील कुमार चित्तौड़ ने कहा कि बिगड़ी कानून-व्यवस्था को लेकर जनता में आक्रोश है। स्थिति यह है कि पिछली सरकार से 33 प्रतिशत अपराध इस सरकार में बढ़ें हैं। इस पर नेता विरोधी दल अहमद हसन ने भी कहा कि रायबरेली घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि प्रदेश सरकार के मंत्री ही दो खेमों में बंटे हैं। एक मरने वालों के साथ तो दूसरा मारने वालों के समर्थन में खड़ा है। ऐसे में प्रदेश की जांच एजेंसियां निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगी। उन्होंने सीबीआई जांच कराने के साथ मारे गए लोगों के परिवारीजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
100 दिनों में ही 'क्राइम स्टेट' बन गया है प्रदेश
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सपा ने प्रदेश की खराब कानून-व्यवस्था के मसले पर विधान परिषद में हंगामा किया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा नेताओं ने बाद में बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया। वहीं, रायबरेली हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग कर रहे बसपा सदस्यों ने भी सदन का बहिर्गमन किया।
विधान परिषद में नियम 105 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कहा कि सीतापुर में व्यापारी हत्याकांड में जो गिरफ्तारियां की गई हैं, उससे उनका परिवार ही असंतुष्ट है। नेता विरोधी दल अहमद हसन ने कहा कि शुरुआती 100 दिनों में ही यूपी क्राइम प्रदेश बन गया है। पुलिस का मनोबल टूट गया है। पुलिस वालों तक की हत्या हो रही है।
वाराणसी में सराफा व्यापारियों की हत्या हो या मथुरा में हत्या। सरकार पर से अब आम जनता का विश्वास उठ गया है। मुख्यमंत्री तक के निर्देशों को अफसर नहीं मान रहे।
नेता विरोधी दल ने कहा कि सरकार केवल बात नहीं बल्कि काम से जानी जाती है। सरकार कोरी घोषणाएं और फर्जी आंकड़े पेश कर रही है।
भाजपा ने दिया जवाब, पहले चिंता की होती तो विपक्ष में न होते
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नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि आज जो दुख व चिंता विपक्षी दिखा रहे हैं यदि ऐसी चिंता पहले दिखाई होती तो जनता उन्हें विपक्ष में न बैठाती। पिछली सरकार में यूपी के थाने धर्म विशेष के कार्यालय बन गए थे।
पुलिस का मनोबल बढ़े सरकार इसकी कोशिश कर रही है। पहले जघन्य अपराध थाने में दर्ज नहीं होते थे। अब सभी छोटे बड़े अपराधों को दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यदि अपराध दर्ज नहीं होंगे तो कार्रवाई कैसे होगी।
नेता सदन ने कहा कि 100 दिन में शतप्रतिशत परिणाम की अपेक्षा रखी जा रही है। जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने सदन का बहिर्गमन किया।