किसान को यूरिया की बोरी पर फिलहाल सरकार को दो हजार रुपये तक सब्सिडी देनी पड़ रही है। ऊपर से इसके लिए विदेश पर निर्भरता अलग समस्या है। नैनो यूरिया पर सरकार को कोई सब्सिडी नहीं देनी पड़ेगी क्योंकि यह दानेदार यूरिया से बहुत सस्ती है और आने वाले समय में देश इसके उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा। नैनो यूरिया के प्रयोग के लिए कृषि, गन्ना विभाग आदि किसानों को स्प्रिंकलर दे रहे हैं। इसके सही छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक पर भी जोर दिया जा रहा है।
उर्वरा शक्ति भी ज्यादा
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान सस्थान मेरठ के निदेशक डॉ. आजाद सिंह पवार कहते हैं कि नैनो यूरिया की उर्वरा शक्ति दानेदार यूरिया से ज्यादा है। धान, गेहूं, गन्ना, तिलहन, सब्जियाें आदि के लिए यह बेहद मुफीद है। 500 एमएल की एक बोतल पूरे एक एकड़ खेत के लिए काफी है।
उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
यूपी नैनो यूरिया के बड़े उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। बरेली स्थित आंवला व प्रयागराज स्थित फूलपुर में नैनो यूरिया प्लांट बनाने का काम चल रहा है। फिलहाल अहमदाबाद से पूरी आपूर्ति की जा रही है। बंगलूरू, असम व झारखंड में प्लांट लगाए जाएंगे। पहले इन प्लांटों में नैनो यूरिया की वार्षिक प्रोडक्शन क्षमता 14 करोड़ बोतल की होगी। बाद में इसे बढ़ाकर 18 करोड़ और फिर 32 करोड़ तक ले जाया जाएगा।
हर जगह उपलब्ध
नैनो यूरिया सभी साधन सहकारी समितियों, आईएफएफडीसी, एग्री जंक्शन, डीसीएफ, मार्केटिंग समितियों, केंद्रीय उपभोक्ता भंडारण, इफ्को किसान सेवा केंद्र, मंडी समिति, इफ्को ई-बाजार आदि पर उपलब्ध हैं।