लखनऊ। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पुरस्कारों से उर्दू के शायर और साहित्यकार इस बार नहीं नवाजे जा सकेंगे। अकादमी में डेढ़ साल से न तो चेयरमैन है और न ही कार्यकारिणी के सदस्य। ऐसे में उर्दू शायरों व साहित्यकारों को मिलने वाले पुरस्कारों के साल 2024 के नाम तय नहीं हो सके हैं। अकादमी का कार्यकाल पूरा हुए 15 महीने बीतने के बाद भी सरकार ने नई कार्यकारिणी का गठन नहीं किया और न ही चेयरमैन के नाम की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश राज्य उर्दू अकादमी की स्थापना उर्दू भाषा और साहित्य के विकास के लिए हुई थी। यह उर्दू कोचिंग, कंप्यूटर सेंटर, उर्दू शायरों व साहित्यकारों की किताबों का प्रकाशन करने के साथ ही शायरों व साहित्यकारों को पुरस्कार देने और जरूरतमंद शायरों को आर्थिक मदद भी देती है। प्रदेश सरकार ने सितंबर 2021 में उर्दू अकादमी की 24 सदस्यीय कार्यकारिणी गठन कर चौधरी कैफुल वरा को चेयरमैन बनाया था। कार्यकारिणी का दो साल का कार्यकाल सितंबर 2023 में समाप्त हो चुका है। नई कार्यकारिणी का गठन न होने और अकादमी में चेयरमैन की नियुक्ति न होने से पुरस्कारों के लिए शायरों और साहित्यकारों के नाम तय नहीं पाए हैं।
साल 2023 के भी पुरस्कार अटके
उर्दू अकादमी के सचिव शौकत अली ने बताया कि अकादमी के पुरस्कारों के लिए शायरों और साहित्यकारों के नाम कार्यकारिणी तय करती है। चेयरमैन की मंजूरी के बाद पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। बताया कि 15 महीनों से अकादमी बगैर कार्यकारिणी कार्य कर रही है। ऐसे में साल 2023 के पुरस्कारों के बाद इस साल के पुरस्कारों के नाम भी तय नहीं सके हैं।
150 साहित्यकारों को 50 लाख रुपये का मिलता है पुरस्कार
उर्दू अकादमी 150 शायरों और साहित्यकारों में 50 लाख रुपये के पुरस्कारों का वितरण करती है। इसमें सबसे बड़े मौलाना आजाद पुरस्कार से सम्मानित होने वाले साहित्यकार को 5 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। वहीं, सबसे कम धनराशि वाला पुरस्कार 10 हजार रुपये का दिया जाता है।