उत्तर प्रदेश में कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिये शुक्रवार को नगर विकास विभाग द्वारा प्रस्तावित शहरी हरित नीति को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इसके तहत शहरी निकायों में हरित पहलों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रीन सिटी मॉनिटरिंग प्रणाली को विकसित कर शहरों को उनकी हरित पहल के आधार पर ग्रीन स्टार रैंकिग दी जाएगी। शहरों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वर्टिकल और रूफ टॉफ गार्डन के अलावा मियावाकी प्रणाली से जंगल विकसित किए जाएंगे।
नए भवन निर्माण के लिए हरित भवन मानकों को अनिवार्य किया जाएगा, जो पर्यावरण के अनुकूल सामग्री, ऊर्जा बचाने वाली प्रौद्योगिकी और ग्रीन रूफ्स को बढ़ावा देगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से धनराशि जुटाने का प्रावधान है। इसमें अमृत 2.0, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, केंद्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग शामिल हैं। इसके अलावा शहरी स्थानीय निकाय अपनी आय, सीएसआर फंड और अन्य स्रोतों से भी सहायता ले सकते हैं।
यह भी पढ़ेंः- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: राज्यपाल राजभवन...सीएम गोरखपुर में करेंगे योग, प्रदेश में 100 से अधिक योग पार्क विकसित
शहरी हरित नीति के तहत ग्रीन सिटी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क स्थापित होगा। इसके तहत शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। शहरों को उनके ग्रीन कवर और हरित पहलों के आधार पर ग्रीन सिटी, ग्रीन प्लस, ग्रीन प्लस प्लस और ग्रीन प्लस प्लस प्लस की रैंक प्रदान की जाएगी। प्रत्येक शहर की निगरानी स्थानीय, राज्य और तीसरे पक्ष की एजेंसियों द्वारा की जाएगी। सर्वाधिक रैंकिग प्राप्त करने वाले शहर अल्टीमेट ग्रीन सिटी का पुस्कार प्राप्त करेंगे।