मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने के एलान से करीब 1,000 किसानों को राहत मिलेगी। गृह विभाग ने जिलों से दर्ज केस का ब्योरा मांगा है।सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पराली जलाने से हो रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के आदेश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने इसके बाद पराली जलाने पर रोक लगाने के साथ पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे।
मेरठ, शामली, पीलीभीत, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, संभल, आगरा, मैनपुरी, एआ,हाथरस, कासगंज, कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, झांसी, ललितपुर, हरदोई, खीरी, रायबरेली, उन्नाव, अयोध्या, अंबेडकरनगर, अमेठी, कौशांबी, प्रतापगढ़, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, चंदौली, जौनपुर, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, भदोही व गौतमबुद्धनर आदि जिलों में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर की जानकारी सामने आई है। सर्वाधिक मामले पीलीभीत, लखीमपुर खीरी व महराजगंज के बताए गए हैं। इससे किसानों में जबर्दस्त नाराजगी थी और सत्ताधारी दल के नेताओं ने भी कई जगह इस कार्रवाई पर विरोध जताया था। बताया गया है कि इसके बावजूद प्रदेश में पराली जलाने के 1,000 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं। इन मामलों से जुड़े किसानों को कोर्ट-कचहरी, पुलिस का चक्कर लगाना पड़ रहा है। चुनाव से पहले सरकार ने मुकदमा वापसी का एलान कर परेशान किसानों की नाराजगी दूर करने की पहल की है।
बताया गया है कि विभिन्न जिलों में दर्ज कराए गए 868 मामलों में न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। पुलिस लखीमपुर खीरी में 165, महराजगंज में 129 व पीलीभीत में 108 मामलों में न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। रामपुर में 45, रायबरेली में 43, उन्नाव में 31, झांसी में 30, संभल, मैनपुरी व अमेठी में 22-22, चंदौली में 27, औरैया में 25 व सिद्धार्थनगर में 23 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल होने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।