प्रदेश के 44 सूखा प्रभावित जिलों के लिए मांगे गए 6138 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पैकेज केंद्र से मिलना आसान नहीं है। वजह प्रदेश में आपदा राहत मद में पहले से मौजूद रकम को सूखा राहत में खर्च करने की जगह पैकेज मांगने में ज्यादा तेजी दिखाना है।
हालांकि कृषि उत्पादन आयुक्त ने टीम से किसानों की मदद के लिए प्रदेश द्वारा मांगी गई पूरी रकम देने का आग्रह किया है।
शनिवार को सूखा प्रभावित नौ जिलों का दौरा कर लौटे केंद्रीय दल ने कृषि उत्पादन आयुक्त वीएन गर्ग के साथ उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया।
इसमें दल के मुखिया संयुक्त सचिव कृषि उत्पल कुमार सिंह व उनके साथ आए अन्य अधिकारी शामिल हुए। सिंह ने दल की तीनों टीमों के नौ जिलों के भ्रमण व वहां के किसानों से बातचीत के आधार पर सूखे से किसानों के नुकसान पर सहमति जताई।
हर साल केंद्र देता है 400 करोड़
सूत्रों का कहना है कि टीम के सदस्यों ने इस ओर भी ध्यान खींचा कि तमाम किसानों को सिंचाई के लिए डीजल का कोई बंदोबस्त नहीं है। इससे उन्हें केंद्र से डीजल पर मिलने वाली 50 प्रतिशत की सब्सिडी तक नहीं मिल पा रही है।
इसके अलावा केंद्र से पैकेज तो मांग लिया गया लेकिन हर साल केंद्र से आपदा राहत मद में दिए जाने वाले बजट का उपयोग जिलों में नहीं दिख रहा है। केंद्र हर साल करीब 400 करोड़ रुपये आपदा राहत मद में प्रदेश को देता है।
केंद्र के अधिकारियों ने प्रदेश के अफसरों से सूखे से 50 प्रतिशत नुकसान का साइंटिफिक आधार पर आकलन कर जल्द रिपोर्ट भेजने का आग्रह किया। साथ ही प्रदेश के राजस्व, कृषि, पशुपालन, सिंचाई, विद्युत व जल निगम आदि की ओर से सूखा राहत में कहां क्या कार्यवाही की है, इसका भी साथ में ब्यौरा देने को कहा है।
खासतौर से नलकूप, हैंडपंप, डीजल सब्सिडी व चारे की व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं तत्काल मांगी है। कृषि उत्पादन आयुक्त गर्ग ने अधिकारियों को एक अक्तूबर तक टीम द्वारा मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मुख्य सचिव से भी मिली केंद्रीय टीम
गर्ग ने कहा कि तभी किसानों के नुकसान की भरपाई की जा सकेगी। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व किशन सिंह अटोरिया, प्रमुख सचिव पशुपालन अनंत कुमार सिंह, राहत आयुक्त लीना जौहरी आदि उपस्थित रहे। टीम ने बैठक से पहले मुख्य सचिव आलोक रंजन से भी भेंट की।