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यूपी: दलितों में पासी समाज को केंद्र में रखकर आखिर क्यों राजनीति कर रही है कांग्रेस, क्या है राहुल का प्लान?

Tue, 20 Aug 2024 10:29 PM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Rahul Gandhi plan: राहुल गांधी लोकसभा चुनाव से पहले भी दलितों को फोकस करके अपने चुनावी मुद्दे तय कर रहे थे। चुनाव परिणामों के बाद भी वह एक प्लान के तहत आगे बढ़ रहे हैं। 
 
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राहुल गांधी का चुनावी प्लान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस ने 2027 की तैयारी शुरू कर दी है। वह सामाजिक न्याय के एजेंडे के साथ ही जाति आधारित गोलबंदी बढ़ा रही है। दलितों में पासी समाज पर लगातार फोकस कर रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मंगलवार को रायबरेली यात्रा भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

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लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और जाति जनगमना के मुद्दे को जोरशोर से उठाया। इसका फायदा भी मिला। इसी बीच दलितों को जोड़ने की रणनीति तैयार की गई। दलित संवाद और दलितों के साथ सहभोज के बाद कांग्रेस ने पासी समाज पर फोकस बढाया है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी और भाजपा अपने- अपने तरीके से पासियों को लुभाने में लगी हैं। 

सपा ने राष्ट्रीय स्तर पर अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद को पासी समाज के चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया है। अवधेश प्रसाद ने अपने शपथ ग्रहण में दो पासी प्रतीकों - उदा देवी और महाराजा बिजली पासी का उल्लेख किया। ऐसे में कांग्रेस ने भी पिछले दिनों संविधान सभा के सदस्य और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ 1952 और 1957 में सांसद रहे लखनऊ के मसुरियादीन पासी की पुण्य तिथि मनाई । 
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अर्जुन की हत्या पर यूं नहीं पहुंचे राहुल 
अब कांग्रेस ने पासी समाज के युवक अर्जुन की हत्या के मामले को गरमा रही है। यह पूरा प्रकरण दलित बनाम सवर्ण सियासत के आसपास पहुंचने लगा है। यही वजह है कि मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रायबरेली पहुंचे। उन्होंने अर्जुन पासी के परिजनों से मुलाकात की। भरोसा दिया कि उत्पीड़न के मामले को सड़क से सदन तक उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति है कि अर्जुन पासी के मामले को लेकर विधानसभा की 103 सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत की जाए। पार्टी यह भी रणनीति बना रही है कि दलितों से जुड़े मुद्दे पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भी अब अर्जुन पासी की हत्या का मुद्दा उठाया जाएगा।

क्या है आधार
उत्तर प्रदेश में जाटवों के बाद पासी दूसरा सबसे बड़ा दलित समुदाय है, जो राज्य की कुल अनुसूचित जाति आबादी का लगभग 16 प्रतिशत है। समाज के लोगों का दावा है कि वे करीब 103 सीटों पर प्रभाव रखते हैं, जिसमें 70 सीटें ऐसी हैं, जहां पासी समाज ही निर्याणक भूमिका में हैं।

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