एंबुलेंसकर्मियों की हड़ताल को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। एंबुलेंसकर्मियों को काम पर लौटने के लिए 24 घंटे का वक्त दिया गया है। गुरुवार को 130 एंबुलेंसकर्मी बर्खास्त कर दिया गया है। कुछ कर्मियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापा मारना शुरू कर दिया है। प्रदेश में करीब 18 जिले में सेवा पूरी तरह से प्रभावित रही, जबकि 35 जिलों में करीब 50 फीसदी कार्य हुआ है। अन्य जिलों में सेवा में किसी तरह व्यवधान नहीं हुआ है।
प्रदेश में मानदेय बढ़ाने, एएलएस कर्मियों को पूरी तरह से समायोजित करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर पांच दिन से एंबुलेंसकर्मी हड़ताल पर है। एस्मा लागू होने के बाद भी हड़ताल के आरोप में पहले दिन 11 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। दूसरे दिन 570 को बर्खास्त किया गया। इस दौरान पुलिस फोर्स लगाकर एंबुलेंस की चाबियां ले ली गई और नए ड्राइवर को लगाकर कार्य शुरू किया गया। गुरुवार को भी पूरे प्रदेश में हड़ताल का असर दिखा।
इस बीच वेंटीलेटर युक्त एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस (एएलएस) संचालन में समस्या आई। कार्यदायी संस्थान ने कर्मियों को 24 घंटे का वक्त दिया है। कर्मियों के नहीं लौटने पर नए सिरे से कवायद शुरू की जाएगी। कार्यदायी संस्था जीवीके ईएमआरआई के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट टीवीएसके रेड्डी ने कहा कि कुछ कर्मचारी काम पर लौट रहे हैं। उम्मीद है कि शुक्रवार तक अन्य भी लौट आएंगे। शुक्रवार की स्थिति देखने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। प्रदेश को लोगों को हर हाल में सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
शुरू हो गई तलाश
सूत्र बताते हैं कि कार्यदायी संस्थान जीवीके कार्यालय में समय- समय पर कर्मचारियों की भर्ती संबंधित बायोडाटा लिया जाता है। पिछली भर्ती में जिन लोगों का नाम वेटिंग लिस्ट में था, उसे निकाला जा रहा है। ऐसे अभ्यार्थियों को फोन करके सेवा का मौका दिया जा सकता है।
कितनी हैं एंबुलेंस
राज्य में 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा के 2200 वाहन हैं। इससे हर दिन करीब 9500 मरीज जाते हैं। इसी तरह गर्भवती व प्रसूता के लिए कार्यरत102 एंबुलेंस की संख्या करीब 2270 है। जबकि एएलएस की संख्या करीब 250 है।