प्रदेश सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों की अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे एक आईएएस अधिकारी को यूपी से जाने और एक के आने का रास्ता साफ हो गया है। प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी शन्मुगा सुंदरम एमके. भी अगले महीने लौट सकते हैं।
छत्तीसगढ़ काडर की 2006 बैच की आईएएस अधिकारी श्रुति सिंह सचिव व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के पद पर कार्यरत हैं। वह मार्च 2018 में अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर आई थीं। इसी तरह यूपी के 2006 बैच के सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी ऋषिकेश भास्कर यशोद मार्च 2018 में यूपी से महाराष्ट्र अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर गए थे। इन दोनों ही अधिकारियों की पांच वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि अगले महीने पूरी हो रही है। जानकार बताते हैं कि दोनों ही अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने के लिए आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने इसमें राज्य सरकार की सहमति मांगी थी। सरकार ने श्रुति की यूपी में व ऋषिकेश की महराष्ट्र में तैनाती अवधि बढ़ाने पर सहमति न देने का फैसला किया है। इससे अगले महीने श्रुति को अपने छत्तीसगढ़ काडर जाना होगा और ऋषिकेश को महाराष्ट्र से यूपी आना होगा।
प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी शन्मुगा सुंदरम एमके. अपनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी कर अगले महीने लौट सकते हैं। वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चेन्नई में विकास आयुक्त एमईपीजेड-सेज के पद पर तैनात हैं। इनकी प्रतिनियुक्ति भी पूरी हो रही है।
तीन आईएएस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार
शासन ने तीन आईएएस अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। फिरोजाबाद के नगर आयुक्त घनश्याम मीणा को फिरोजाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का और अलीगढ़ की मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा राणा को अलीगढ़ के संभागीय खाद्य आयुक्त (आरएफसी) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह अपर मुख्य सचिव राजनीतिक पेंशन रजनीश गुप्ता को सदस्य राजस्व परिषद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
प्रमोटी आईएएस रविंद्र पाल का वीआरएस प्रत्यावेदन केंद्र के हवाले
विशेष सचिव भाषा रविंद्र पाल सिंह का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग संबंधी प्रत्यावेदन केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। केंद्र के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। प्रमोटी आईएएस अधिकारी रविंद्र पाल सिंह ने पिछले वर्ष 14 दिसंबर 2022 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति संबंधी प्रत्यावेदन शासन को दिया था। चूंकि वीआरएस के लिए कई शर्तें हैं जिसमें एक निश्चित सेवा पूरी करना और आईएएस में पदोन्नति के दो वर्ष बाद कन्फर्मेशन शामिल है। रविंद्र अक्तूबर 2021 में पीसीएस संवर्ग से आईएएस में पदोन्नत हुए थे। अभी आईएएस संवर्ग में कन्फर्मेशन नहीं हुआ है। ऐसे में उन्होंने किसी भी स्थिति में वीआरएस पाने के लिए कहा था कि कोई तकनीकी समस्या हो तो उन्हें आईएएस से पीसीएस संवर्ग में वापस कर (प्रत्यावर्तित) वीआरएस दे दिया जाए।
शासन के एक अधिकारी ने बताया कि रविंद्र पाल सिंह का प्रत्यावेदन राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को पिछले महीने ही भेज दिया गया है। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। पूर्व में प्रमोटी आईएएस अधिकारी व विशेष सचिव औद्योगिक विकास राकेश वर्मा ने भी ठीक इन्हीं स्थितियों में वीआरएस के लिए आवेदन किया था। प्रदेश सरकार ने केंद्र का निर्देश पाने के बाद उन्हें आईएएस से पीसीएस संवर्ग में वापस कर वीआरएस को मंजूरी दी। माना जा रहा है कि प्रकरण में केंद्र का दिशानिर्देश आने के बाद रविंद्रपाल के प्रत्यावेदन पर फैसला होगा।
सात बीडीओ और दो संयुक्त विकास आयुक्त के तबादले
शासन ने सोमवार को ग्राम्य विकास विभाग के पांच खंड विकास अधिकारियों और तीन संयुक्त विकास आयुक्त के तबादले किए हैं। ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय लखनऊ में संबद्ध श्याम मुरली मनोहर मिश्रा को खंड विकास अधिकारी सिद्धार्थनगर के पद पर तैनाती दी थी। बीडीओ कृतिका अवस्थी को गोरखपुर से सिद्धार्थनगर, प्रीति वर्मा को गोरखपुर से बाराबंकी, सुरेश कुमार मौर्य को गोरखपुर से संतकबीरनगर, विजय कुमार सिंह को संतकबीर नगर से गोरखपुर, यशोधर्वन सिंह को बाराबंकी से गोरखपुर और आनंद कुमार गुप्ता को सिद्धार्थनगर से गोरखपुर में बीडीओ के पद पर स्थानांतरित किया है। आजमगढ़ मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त ओमप्रकाश आर्य को संयुक्त विकास आयुक्त गोरखपुर मंडल, महेश नारायण पांडेय को गोरखपुर मंडल से आजमगढ़ मंडल में संयुक्त विकास आयुक्त के पद पर स्थानांतरित किया है।