कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने से संबंधित धारा-80 के अंतर्गत लैंड यूज (भू-उपयोग) बदलने की प्रक्रिया का भी डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इसमें पहले आवेदन, अनुमोदन और अभिलेख अपडेट के लिए बार-बार दौड़-भाग करनी पड़ती थी। अब सभी जरूरी जानकारियां जैसे भूमि का खसरा-खतौनी विवरण, मौजूदा उपयोग की स्थिति और आसपास के क्षेत्र की जानकारियां ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में एक बार में ही ली जाएगीं। गैरजरूरी औपचारिकताओं को हटाकर डिजिटल जांच की व्यवस्था की गई है, जिससे लेखपाल की तरफ से बार-बार रिपोर्टिंग की जरूरत समाप्त हो जाएगी। विभाग ने आवेदन फॉर्म, रिपोर्ट और प्रमाण के सरल प्रारूप का परीक्षण पूरा कर लिया है।
प्रक्रिया संबंधित सभी नोटिस अब डाक के बजाय ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या वाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदक को तत्काल सूचना मिले सकेगी। स्टांप एवं पंजीकरण विभाग की भी मदद ली जा रही है, जो डाटा फ्लो को अधिक प्रभावी बनाएगा। प्रक्रिया के तहत नामांतरण प्रमाणपत्र और भू-उपयोग परिवर्तन प्रमाणपत्र कुछ ही दिनों में ऑनलाइन भी उपलब्ध हो सकेगा। इस डिजिटल पहल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि संपत्ति की खरीद-बिक्री में होने वाले अपराध और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश में भी वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।