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UP: हाईकोर्ट ने कहा- माता और पिता के कस्टडी विवाद में बच्चे को सीधे बोर्डिंग स्कूल में नहीं भेजा जा सकता

Fri, 23 Jan 2026 08:57 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने माता-पिता के कस्टडी विवाद में अहम फैसला देते हुए कहा कि बच्चे को सीधे बोर्डिंग स्कूल नहीं भेजा जा सकता। इसके लिए बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है। कोर्ट ने बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए फैमिली कोर्ट को निर्णय का अधिकार दिया है।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सात साल के बच्चे को पास रखने के लिए माता- पिता के बीच चल रहे कस्टडी विवाद में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि माता - पिता के कस्टडी विवाद में बच्चे को सीधे बोर्डिंग स्कूल में नहीं भेजा जा सकता है। इसके लिए बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्या बच्चा माता- पिता से अलगाव सहन कर सकता है।

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मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला कस्टडी विवाद में बच्चे के पिता द्वारा दाखिल विशेष अपील और सात वर्षीय बच्चे की ओर से माता की विशेष अपील पर एक साथ सुनवाई करके दिया। बच्चे को अपने पास रखने के लिए माता - पिता में कानूनी विवाद चल रहा है।

बच्चे को कस्टडी विवाद के चलते बोर्डिंग स्कूल भेजने के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा, फैमिली कोर्ट लखनऊ को तय करने के लिए खुला है, अगर विशेषज्ञों की राय (रिपोर्टस) इसके समक्ष पेश की जाएं। फैसले के मुताबिक, बच्चे के माता - पिता का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था, जिससे बाद 2018 में उन्हें यह बच्चा पैदा हुआ।
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आपसी संबंधों में तल्खी के कारण माता और पिता अलग रहने लगे और एक दूसरे के खिलाफ कई कानूनी कार्यवाहियां शुरू कर दीं। इस बीच माता, बच्चे के साथ झारखंड के धनबाद से लखनऊ आ गई। माता का आरोप है कि लखनऊ आकर पिता, माता की कस्टडी से, बच्चे को घुमाने के बहाने लेकर धनबाद लेकर गया। इस मामले में दो विशेष अपीलें हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी। जिन्हें कोर्ट ने आदेश देकर निस्तारित कर दिया।

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