संघर्ष से सफलता तक की यात्रा
पूजा सिंह का जन्म जौनपुर के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। पिता की सीमित आय में परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था, जिसके चलते उन्होंने अभाव को करीब से देखा। इन कठिनाइयों ने पूजा को कमजोर नहीं किया, बल्कि उनकी इच्छाशक्ति को और मजबूत बनाया।
उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाने का निश्चय किया ताकि वे अपना और अपने परिवार का भविष्य संवार सकें। पूजा ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली में पूरी की, लेकिन आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं हो सका। जौनपुर लौटकर उन्होंने टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
अभ्युदय योजना: सपनों को मिली उड़ान
वर्ष 2024 में, पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने मई 2024 में आवेदन किया और जून 2024 से इस योजना के तहत मुफ्त कोचिंग प्राप्त करने लगीं। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के होनहार विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई है। अभ्युदय योजना के माध्यम से पूजा को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला, नियमित कक्षाएं मिलीं और एक व्यवस्थित पाठ्यक्रम का पालन करने का अवसर प्राप्त हुआ।
कॉलेज के बाद, वे डेढ़ घंटे की कक्षाओं में भाग लेती थीं, जहाँ शिक्षकों ने विषयों को सरल भाषा में समझाया और बार-बार रिवीजन व नोट्स के माध्यम से उनकी तैयारी को मजबूत किया। पूजा के अनुसार, निजी कोचिंग संस्थानों में 1 से 1.50 लाख रुपये तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए असंभव था। अभ्युदय योजना ने न केवल यह आर्थिक बोझ समाप्त किया, बल्कि उन्हें नया आत्मविश्वास भी दिया।
समर्पित प्रयास और गौरवशाली परिणाम
अभ्युदय योजना से मिली सहायता और मार्गदर्शन के बल पर, पूजा ने अत्यंत लगन और समर्पण के साथ तैयारी की। इसका परिणाम यह हुआ कि उन्होंने यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयनित हुईं।
यह उपलब्धि केवल पूजा की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों की सफलता का भी एक जीवंत उदाहरण है। पूजा सिंह की इस असाधारण सफलता से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है। यह योजना उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते।