बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) के कार्य बहिष्कार और क्रमिक अनशन के मद्देनजर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने जेई की गैरहाजिरी में तकनीकी कर्मियों को काम करने का आदेश दिया है। यानी अब खुद को विभाग की रीढ़ बताने वाले जेई जितने दिन चाहे क्रमिक अनशन, कार्य बहिष्कार और हड़ताल करें, इसका आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
वेतन विसंगति को लेकर शक्ति भवन पर एक पखवाड़े से क्रमिक अनशन कर रहे जेई की वजह से उपभोक्ताओं की सप्लाई संबंधी शिकायतोें के निराकरण में दिक्कतें आ रही हैं। पावर कॉर्पोरेशन ने इस समस्या को दूर करने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधिशासी अभियंता (मानव संसाधन एवं प्रशासन) आनंद कुमार कनौजिया नेअयोध्या, देवीपाटन, लखनऊ, लेसा सिस गोमती, लेसा ट्रांस गोेमती एवं बरेली जोन के मुख्य अभियंताओं को जेई के गैर हाजिर रहने पर तकनीकी (टेक्नीशियन ग्रेेड-दो) कर्मियों से काम कराने का आदेश दिया है। अधीक्षण अभियंता (वितरण) एवं अधिशासी अभियंता (वितरण) अधीनस्थ कार्यरत तकनीकी कर्मी को जेई के अधिकार के लिए नामित कर अधिकृत करेंगे। इसी तर्ज पर पूर्वांचल निगम वाराणसी, पश्चिमांचल निगम मेरठ, दक्षिणांचल निगम आगरा एवं केस्को कानपुर में तकनीकी कर्मियों को अधिकार मिलेंगे।
600 डिप्लोमा धारकों लाटरी
कॉर्पोरेशन के प्रदेश भर में 600 ऐसे तकनीकी कर्मी है जो जेई की शैक्षिक योग्यता का तीन वर्षीय डिप्लोमा कर चुके हैं। प्रबंधन उनको 8.33 फीसदी कोटे के तहत जेई के पद पर सीधे प्रोन्नत करने में आनाकानी कर रहा। लेकिन अब इनकी लाटरी निकल आई है। इस फैसले से इनका फायदा होने जा रहा। वैसे भी प्रदेश भर में 1000 से अधिक जेई के पद रिक्त हैं।
भ्रष्टों पर कार्रवाई की तैयारी
कॉर्पोरेशन प्रबंधन भ्रष्ट जेई एवं प्रोन्नत इंजीनियर पर कार्रवाई करने जा रहा है। खासकर जो जेई एवं प्रोन्नत इंजीनियर बिजली चोरी कराने में संलिप्त रहे और वर्तमान में मलाईदार उपकेंद्र एवं उपखंड में जमें हैं।