भाजपा के वरिष्ठ नेता व कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने अखिलेश यादव की शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब चाचा-भतीजे की मुलाकात का न कोई मतलब है और न ही लाभ। यह शुद्ध रूप से चुनावी मुलाकात है। यह दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए वाली बात है।
सुरेश खन्ना ने बृहस्पतिवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि यह बहुत देर में होने वाली मुलाकात है। अब जनता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में काम करने वाली दमदार और ईमानदार सरकार को दोबारा प्रचंड बहुमत से सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उसे डबल इंजन की सरकार की ताकत और उसके काम का अहसास है। वह देख रही है कि पहले की सरकारों ने जिन योजनाओं को दशकों तक लटकाए रखा उनको भी डबल इंजन की यह सरकार पूरा कर रही है।
यही भाजपा की मौजूदा और पहले की अन्य दलों की सरकारों में फर्क भी है। खन्ना ने कहा कि वैसे भी जो रिश्ते टूट जाते हैंए वह पहले जैसे कभी नहीं हो पाते। चाचा-भतीजे के रिश्ते में गांठ पड़ चुकी है। लिहाजा अब उनमें पहले जैसा भाव कभी भी नहीं आने वाला।
कै बिनेट मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए समाजवाद सिर्फ मुखौटा है। व्यक्ति, संस्था या विचार झूठ के सहारे लंबे समय तक टिक नहीं पाते। बेहतर होगा कि सपा अध्यक्ष अबसे भी इस शाश्वत सत्य को जान लें।
सिद्धार्थनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि व्यक्ति के रूप में अखिलेश बहुत बड़े झूठे हैं। हाल के दिनों हर विकास योजना का श्रेय लेने के लिए उन्होंने लगातार झूठ बोला है और बोले जा रहे हैं। अब तो उनके इस झूठ पर लोग हंसने लगे हैं। रही संस्था और विचार के रूप में उनके समाजवाद और समाजवादी विचारों की बात तो ये दोनों नकली हैं। जिस डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवाद की वह बात करते हैं उससे उनका रत्ती भर भी ताल्लुक नहीं है।
अखिलेश ने तो समाजवाद की परिभाषा ही बदल दी। उनका समाजवाद सैफई का समाजवाद है। जिसका मतलब भाई-भतीजावाद, अराजकता, अतीक, मुख्तार अंसारी, हरिशंकर तिवारी जैसे माफिया और बेगुनाहों का खून बहाने वाले आतंकवादियों की पैरवी करना है। इसके जरिये वह जातियों की गोलबंदी कर रहे हैं। उनका एकमात्र मकसद येन-केन प्रकारेण सत्ता हासिल करना है। इसके लिए वह किसी भी हद तक गिर सकते हैं।