प्रत्येक जिले में सांस्कृतिक क्षेत्र के बहुरंगी रीति-रिवाजों, परंपराओं, खानपान, खेलकूद, पहनावा सहित अन्य घटकों के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल दिया जाएगा।
प्रदेश की संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए संस्कृति नीति तैयार की जा रही है। संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बृहस्पतिवार को वर्चुअल बैठक में संस्कृति नीति के मसौदे, विभागीय गतिविधियों के प्रचार-प्रसार और राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना पर चर्चा की गई।
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उन्होंने कहा कि संस्कृति नीति रोजगारपरक होने के साथ प्रदेश के सर्वांगीण सांस्कृतिक विकास के साधन के रूप में विकसित होनी चाहिए। प्रत्येक जिले में सांस्कृतिक क्षेत्र के बहुरंगी रीति-रिवाजों, परंपराओं, खानपान, खेलकूद, पहनावा सहित अन्य घटकों के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल दिया जाएगा। साथ ही लुप्त हो रही सांस्कृतिक विधाओं के प्रशिक्षण, संरक्षण, प्रदर्शन को बढ़ावा देना के लिए इस क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक संस्थाओं, संगठनों, संस्कृतिविदों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और इंसेटिव का प्राविधान भी किया जाएगा। उन्होंने संस्कृति नीति का मसौदा प्रदेश के कलाविदों, कलाकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों को उपलब्ध करते हुए उनसे 15 दिन में उनके सुझाव प्राप्त कर नीति प्रकाशित कराने के निर्देश दिए।
राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय स्थापित होगा
लखनऊ के मंडलायुक्त एवं भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय के कुलपति रंजन कुमार ने बताया कि भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय को एक राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय में स्थापित किया जाना चाहिए। इसमें संस्कृति से संबंधित सभी पाठ्यक्रमों, संगीत, नृत्य, ललित कला, विभिन्न लोक नाट्य कलाओं सहित संग्रहालय विज्ञान, पुरातत्व, अभिलेखीय प्रबंधन एवं संरक्षण आदि का पठन-पाठन, शोध, प्रशिक्षण आदि एक ही विश्वविद्यालय में हो सके। प्रमुख सचिव ने राज्य संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में औपचारिक विधिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए।