उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उप्र ने एक मामले में इंडिगो एयरलाइंस पर साढ़े 85 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। आयोग केसदस्य राजेंद्र सिंह ने यह निर्णय सुनाते हुए इसे उपभोक्ता को अदा करने का आदेश दिया है। मामला 15 अप्रैल 2013 का है। स्थानीय निवासी विनय शंकर तिवारी को दिल्ली में एक जरूरी मीटिंग में भाग लेने के लिए जाना था। इसके लिए उन्होंने क्लीयर ट्रिप के जरिए इंडिगो फ्लाइट में टिकट बुक कराया।
इस फ्लाइट के प्रस्थान का समय अमौसी एयरपोर्ट से सुबह दस बजकर पचास मिनट पर था। विनय निर्धारित समय पर यहां पहुंच गए और फ्लाइट में अपनी आवंटित सीट पर जाकर बैठ गए। उड़ान भरने से थोड़ी देर पहले अचानक केबिन क्रू ने आकर बड़ी ही बेरुखी से उन्हें सूचना दी कि उनका टिकट कैंसल हो चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है पर जबरन उन्हें यहां से डिपोट कर दिया गया। उन्होंने इस बाबत क्लीयर ट्रिप से जानकारी की तो बताया गया कि उनकी तरफ से टिकट कैंसल नहीं हुआ है। इंडिगो से जानकारी करने पर बताया गया कि सुबह 7 बजकर 38 मिनट पर उनका टिकट कैंसल हो गया था। विनय ने कहा कि उन्होंने तो टिकट कैंसल कराया ही नहीं।
इस मामले की सुनवाई राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में हुई। आयोग ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि टिकट सुबह सात बजकर 38 मिनट पर कैंसल हो गया था तो विनय शंकर तिवारी को फ्लाइट में चेक इन करने से क्यों नहीं रोका गया। इंडिगो एयर लाइंस ने न ही इस बाबत कोई मोबाइन नंबर दिया और न ही किसी मैसेज का स्क्रीन शॉट। सारी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस में कमी रही और व्यवसाय के लिहाज से भी यह उस व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार रहा जो एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली जा रहे थे।
आयोग ने निर्णय सुनाया कि उपभोक्ता को 35 लाख रुपये हर्जाना, मानसिक उत्पीड़न एवं शोषण के लिए 50 लाख पचास हजार रुपये यानी कुल साढ़े 85 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में अदा किए जाएं। इस पर दस प्रतिशत सालाना ब्याज भी अदा करना होगा।