इन्वेस्ट यूपी में वसूली कांड की जांच के लिए डीजीपी मुख्यालय ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी में बाराबंकी में तैनात एडिशनल एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी, गोमतीनगर के एसीपी विनय द्विवेदी और राजधानी में तैनात इंस्पेक्टर आलोक राव को शामिल किया गया है। बता दें कि इस प्रकरण में अदालत में पुलिस को उस अधिकारी का नाम बताना है, जिसके इशारे पर बिचौलिए निकांत जैन ने उद्यमी से वसूली की थी। माना जा रहा है कि विवेचना तेजी से करने के लिए एसआईटी बनाई गई है।
दरअसल, अभी तक इस मामले मे दर्ज मुकदमे की विवेचना एसीपी गोमतीनगर विनय द्विवेदी कर रहे थे। मुकदमे में एक वरिष्ठ अधिकारी के इशारे पर निकांत जैन द्वारा 5 फीसद कमीशन मांगे जाने का जिक्र है, जिसके नाम का खुलासा करने के लिए अदालत ने कहा है। अब तक विवेचना में वसूली के आरोपों के घेरे में आए निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश का नाम नहीं जोड़ा जा सका है, जबकि उनका निलंबन ही उद्यमी की शिकायत के आधार पर हुआ था।
इतना ही नहीं, बिचौलिए निकांत जैन को रिमांड पर लेकर पूछताछ की भी पुलिस ने जहमत नहीं की, बल्कि अदालत में पेश करने के बाद उसके खिलाफ लगी दो गलत धाराओं को मुकदमे से हटाना पड़ गया। इन वजहों से गोमतीनगर पुलिस की विवेचना के तौर-तरीकों पर तमाम सवाल भी उठने लगे थे। अब एसआईटी इस प्रकरण की गहनता से विवेचना के बाद आईएएस अभिषेक प्रकाश के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाएगी, जिसके बाद उनका नाम मुकदमे में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा इस रैकेट में शामिल इंवेस्ट यूपी के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका का पता भी लगाया जाएगा।