राज्य सड़क परिवहन निगम की दो हजार बसों की न तो लोकेशन मिल रही और न ही स्पीड का पता चल रहा है। इनमें लखनऊ के कैसरबाग व आलमबाग से रवाना होने वाली बसें भी शामिल हैं। यह संकट व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) की खराबी के कारण उत्पन्न हुआ है। प्रबंध निदेशक राजशेखर ने बृहस्पतिवार को मुख्यालय स्थित केंद्रीय कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया तो इस बात का खुलासा हुआ।
प्रबंध निदेशक ने क्षेत्रीय प्रबंधकों व सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिए कि वीटीएस की जांच कराकर उनको चालू करके रिपोर्ट दें। उन्होंने बताया कि निगम की हेल्पलाइन 18001802877 पर रोजाना 1500 से अधिक यात्रियों की शिकायतें दर्ज होती हैं। इनमें से 70 फीसदी का ही निराकरण होता है। प्रबंध निदेशक ने शिकायतों का निराकरण न करने पर चित्रकूट धाम, गोरखपुर, देवीपाटन, आजमगढ़ एवं इटावा के क्षेत्रीय प्रबंधकों को निंदा प्रविष्ट देने के निर्देश दिए और नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यही नहीं प्रबंध निदेशक ने इंटेलीजेंस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत खराब एवं बेहतर कार्य करने वाले 10 लोगों के कार्य का रोजाना ब्योरा मांगा है।
दिव्यांग को कंडक्टर ने बस से उतारा
परिवहन निगम की हेल्पलाइन पर गोरखपुर परिक्षेत्र के पडरौना के यात्री रमजान ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके 100 फीसदी दिव्यांग होने के बाद भी कंडक्टर ने उसे बस से यह कहकर उतार दिया कि सफर करना है तो किराया चुकाना पड़ेगा। इटावा परिक्षेत्र के मोहम्मद मुफीद ने शिकायत की कि यूपी 84-3223 बस के कंडक्टर ने गंतव्य स्थान जहां का टिकट लिया था, से तीन किमी पहले ही उतार दिया।