प्रदेश की बिजली कंपनियों की माली हालत दिनोंदिन खस्ता होती जा रही है। राजस्व वसूली में फिसड्डी होने और उत्पादन कंपनियों को समय से भुगतान न होने पाने की दशा में प्रदेश में बिजली संकट पैदा हो सकता है। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार की ओर से सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को भेजे गए पत्र में इस साल बिजली खरीद और वसूल की गई धनराशि का ब्यौरा देते हुए साफ तौर पर कहा गया है कि बिजली कंपनियों द्वारा कम राजस्व वसूली से वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।
इस अवधि में 21,411 करोड़ रुपये की जो राजस्व वसूली हुई है उसमें सरकारी विभागों से वसूले गई 3558 करोड़ रुपये की धनराशि भी शामिल है। अप्रैल से अगस्त तक कुल कैश गैप बढ़कर 9,148 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसकी वजह से पावर कार्पोरेशन यूपी को बिजली देने वाले उत्पादकों को समय से भुगतान नहीं कर पा रहा है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि मौजूदा राजस्व वसूली के आंकड़ों से साफ है कि बिजली कंपनियां बिजली खरीद लागत तक नहीं निकाल पा रहीं।
पत्र में 20 सितंबर तक की राजस्व वसूली के आंकड़ों का खास तौर पर उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस महीने गैर सरकारी उपभोक्ताओं से 4,912 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य तय किया गया है। 20 सितंबर तक कुल 2485 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं जो 50 फीसदी के आसपास है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 35.64 प्रतिशत, मध्यांचल में 43.34 प्रतिशत, दक्षिणांचल में 43.26 प्रतिशत, पश्चिमांचल वितरण निगम में 59.39 प्रतिशत तथा केस्को में 60.15 प्रतिशत वसूली हो पाई है। पावर कार्पोरेशन प्रबंधन अब अपने स्तर से राजस्व बढ़ाने के लिए बिजली कंपनियों पर दबाव बनाने में जुटा है।
सूत्रों का कहना है कि बिजली उत्पादकों खास तौर पर एनटीपीसी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को समय से भुगतान न होने से आने वाले दिनों में बिजली का संकट खड़ा हो सकता है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम को भी भुगतान करने में दिक्कत आ रही है। कोल इंडिया का बकाया बढ़ता जा रहा है। इससे बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। जिस तेजी से पावर कार्पोरेशन का घाटा बढ़ रहा है उसे देखते हुए बिजली दरों में भारी वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।