अब कहीं से भी बेच सकते हैं स्टांप।
- फोटो : सोशल मीडिया
स्टांप उद्यमी बनाने की दिशा में देश में पहला प्रयोग यूपी ने किया है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने स्टांप को वेंडरों के दायरे से बाहर निकालकर पोस्ट ऑफिस तक पहुंचाने के बाद अब युवाओं को इससे जोड़ने की पहल की है। इसके लिए लाइसेंस प्रक्रिया को सरल किया गया है। इसका परिणाम यह निकला कि 5400 लोग ‘स्टांप उद्यमी’ बन चुके हैं।
स्टांप एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि युवाओं को स्टांप के जरिये उद्यमी बनाने की पहल की गई है। इसके लिए विभाग ने अभियान छेड़ा है- आओ उद्यम करें। कहा कि अभी स्टांप बेचने का लाइसेंस पाना बेहद जटिल है। पुलिस व एलआईयू जांच के बाद भी कई स्तर से गुजरने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। इसे सरल बनाते हुए केवल आधार कार्ड और स्व प्रमाणपत्र देना होगा। स्व प्रमाणपत्र को शपथपत्र के रूप में देना होगा कि आवेदक के खिलाफ किसी तरह का कोई केस दर्ज नहीं है और न किसी आपराधिक मामले में वांछित है। इस प्रक्रिया के बाद एडीएम फाइनेंस को 48 घंटे के अंदर लाइसेंस जारी करना होगा। स्टांप उद्यमी को घर, ऑफिस, दुकान या कहीं से भी स्टांप बेचने की छूट होगी।
12 से 50 हजार कमा रहे प्रति माह
ई स्टांप बेचने की जिम्मेदारी स्टाक होल्डिंग कॉरपोरेशन के पास है। कॉरपोरेशन को आधा फीसदी कमीशन मिलता है। इसमें से जीएसटी हटाने के बाद कॉरपोरेशन स्टांप उद्यमी को 100 रुपये के स्टांप पर 23 पैसा कमीशन दे रहा है। एक लाख रुपये के स्टांप बेचने पर 230 रुपये उद्यमी को दिए जा रहे हैं। आय के इस नए स्रोत से युवा आकर्षित हो रहे हैं। इसीलिए एक महीने में 5400 स्टांप उद्यमी बन चुके हैं जो औसतन 12 हजार से 50 हजार रुपये महीना बिना लागत लगाए कमा रहे हैं। जल्द सहकारी समितियों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। हर जिले में इनकी संख्या न्यूनतम 50 से 100 है।