राजीव गांधी, राहुल गांधी व सोनिया गांधी।
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सियासी जानकारों का कहना है कि गांधी परिवार के ज्यादातर सदस्यों ने उत्तर प्रदेश से सियासी पारी की शुरुआत की। प्रियंका गांधी जब भी उत्तर प्रदेश रहीं, वह अपने परदादा जवाहर लाल नेहरू और दादी इंदिरा गांधी से लेकर पिता राजीव गांधी, मां सोनिया गांधी के कार्यों को गिनाती रही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने रायबरेली में मोती लाल नेहरू द्वारा किए गए आंदोलन को भी बयां किया। मोतीलाल नेहरू और जवाहर लाल नेहरू द्वारा किए गए आंदोलन के बहाने उन्होंने आम जनता को गांधी परिवार से जोड़ा और राहुल गांधी लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे। अब प्रियंका गांधी वायनाड से सियासी मैदान में हैं।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी
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ऐसे में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय कहते हैं प्रियंका गांधी ने कभी भी खुद को उत्तर प्रदेश से अलग नहीं रखा है। ऐसे में वह कहीं से भी सदन में पहुंचे, लेकिन उत्तर प्रदेश की आवाज बुलंद करती रहेंगी। पार्टी के संगठन महासिचव अनिल यादव तर्क देते हैं कि प्रियंका गांधी के सदन में पहुंचने से महिलाओं की आवाज देश के सर्वोच्च सदन में पहुंच सकेगी। उत्तर प्रदेश की हर अप्रिय घटना को लेकर प्रियंका गांधी ने निरंतर विरोध जताया है। लोकसभा में पहुंच कर यह विरोध धमाकेदार तरीके से कर सकेंगी।