बुधवार को केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस दास व उनकी टीम के साथ हुई बैठक में वर्तमान उपलब्धता के साथ-साथ अगले पांच वर्षों के लिए गर्मी के महीनों में पावर बैंकिंग के माध्यम से 500-600 मेगावाट विद्युत प्राप्त करने पर सहमति बनी है। वर्तमान में पीक आवर्स के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के माध्यम से औसतन लगभग 2,400 मेगावाट विद्युत ली जा रही है।
मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों से कोयला खदानों वाले क्षेत्रों में अतिवृष्टि एवं जल भराव के कारण कोयले की आपूर्ति थर्मल पावर प्लांट को पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही है। केंद्रीय, राज्य एवं निजी क्षेत्र की परियोजनाएं जैसे सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा एवं बारा में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है जिससे उत्तर प्रदेश को कुल औसतन 1500 से 2000 मेगावाट नहीं मिल पा रहा है।
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में विद्युत उपलब्धता की कमी के कारण 15 सितंबर को लगभग 16 घंटे तक विद्युत की दर 10 रुपये प्रति यूनिट रही तथा रात में पावर एक्सचेंज में क्लीयरेंस नगण्य रहा। 15 सितंबर को अधिकतम मांग 29800 मेगावाट के आस-पास थी परन्तु उपरोक्त आपदा के कारण 27000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। दिन के समय जब विद्युत उपलब्धता मिल जा रही है तो 10 रुपये की दर पर भी क्रय कर सभी क्षेत्रों को कटौती मुक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। रात्रि के समय 2000 से 3000 मेगावाट की उपलब्धता सुनिश्चित न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है।