फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

UP: रिटायरमेंट के करीब... प्रमोशन की मुश्किल दौड़; पीएसी में 50 की उम्र पार कर चुके 90 मुख्य आरक्षी दौड़ेंगे

अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 12 Sep 2024 10:30 AM IST

सार

50 की उम्र पार कर चुके 90 मुख्य आरक्षी भी दरोगा बनने के लिए दौड़ लगाएंगे। कुल 122 मुख्य आरक्षी पदोन्नति के लिए 3.2 किलोमीटर की दौड़ में शामिल होंगे। पीएसी के मुख्य आरक्षी कई वर्षों से नियमों के फेर में फंसे हैं इसका समाधान नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
UP Police - फोटो : अमर उजाला
पीएसी की 35वीं वाहिनी में मुख्य आरक्षी सुमेर सिंह (बदला हुआ नाम) की सेवानिवृत्ति में तीन महीने शेष हैं। उम्र के इस पड़ाव पर कुछ बीमारियां भी घेर रही हैं। फिर भी कंधे पर स्टार लगाने की चाहत में दरोगा (प्लाटून कमांडर) के पद पर पदोन्नति के लिए 3.2 किमी की दौड़ में शामिल होंगे। 

सुमेर की तरह परीक्षा में पीएसी के 90 ऐसे मुख्य आरक्षी हिस्सा लेने जा रहे हैं, जिनकी उम्र 50 से 59 वर्ष के बीच है। इनमें से कुछ तो जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बता दें कि पीएसी में दरोगा (प्लाटून कमांडर) बनने के लिए 122 मुख्य आरक्षी 3.2 किमी की दौड़ की परीक्षा में शामिल होंगे। 


यह परीक्षा उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आगामी तीन अक्तूबर को महानगर स्थित पीएसी की 35वीं वाहिनी में आयोजित होगी। पदोन्नति के लिए दौड़ लगाने के इस नियम के दायरे में नागरिक पुलिस के सिपाही से लेकर आईपीएस नहीं आते हैं, जबकि उनका मूल कार्य ही अपराधियों को दबोचना है। 

हालांकि पीएसी और अग्निशमन सेवा के कर्मियों को पदोन्नति पाने के लिए दौड़ना जरूरी है। पीएसी की दशकों पुरानी इस समस्या का आज तक समाधान भी नहीं हो सका है। इस नियम को समाप्त करने पर कई बार मंथन तो हुआ, लेकिन प्रस्ताव कैबिनेट की चौखट तक नहीं पहुंच सका।
 
विज्ञापन

UP Police - फोटो : अमर उजाला
पीएसी की 35वीं वाहिनी में मुख्य आरक्षी सुमेर सिंह (बदला हुआ नाम) की सेवानिवृत्ति में तीन महीने शेष हैं। उम्र के इस पड़ाव पर कुछ बीमारियां भी घेर रही हैं। फिर भी कंधे पर स्टार लगाने की चाहत में दरोगा (प्लाटून कमांडर) के पद पर पदोन्नति के लिए 3.2 किमी की दौड़ में शामिल होंगे। 

सुमेर की तरह परीक्षा में पीएसी के 90 ऐसे मुख्य आरक्षी हिस्सा लेने जा रहे हैं, जिनकी उम्र 50 से 59 वर्ष के बीच है। इनमें से कुछ तो जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बता दें कि पीएसी में दरोगा (प्लाटून कमांडर) बनने के लिए 122 मुख्य आरक्षी 3.2 किमी की दौड़ की परीक्षा में शामिल होंगे। 

यह परीक्षा उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आगामी तीन अक्तूबर को महानगर स्थित पीएसी की 35वीं वाहिनी में आयोजित होगी। पदोन्नति के लिए दौड़ लगाने के इस नियम के दायरे में नागरिक पुलिस के सिपाही से लेकर आईपीएस नहीं आते हैं, जबकि उनका मूल कार्य ही अपराधियों को दबोचना है। 

हालांकि पीएसी और अग्निशमन सेवा के कर्मियों को पदोन्नति पाने के लिए दौड़ना जरूरी है। पीएसी की दशकों पुरानी इस समस्या का आज तक समाधान भी नहीं हो सका है। इस नियम को समाप्त करने पर कई बार मंथन तो हुआ, लेकिन प्रस्ताव कैबिनेट की चौखट तक नहीं पहुंच सका।
 

तीन साल पहले हुई थी मृत्यु
बता दें कि तीन वर्ष पूर्व राजधानी में आयोजित परीक्षा में अग्निशमन सेवा के मोहन राम (56 वर्ष) की दौड़ते समय मृत्यु हो गई थी। परीक्षा में शामिल होने से आठ माह पूर्व उन्हें हार्ट अटैक भी पड़ा था। उससे तो जान बच गई, लेकिन दरोगा बनने की चाहत उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गई।

वहीं छह माह बाद महानगर स्थित पीएसी की वाहिनी में दोबारा परीक्षा के दौरान लकड़ी का पैर लगाकर पीएसी का एक मुख्य आरक्षी शामिल हुआ था। कई वर्ष पूर्व बीमारी की वजह से उसका एक पैर काट दिया गया था। उसे भी कोई छूट नहीं मिली थी।

रैंकर की परीक्षा हुई थी समाप्त
करीब एक दशक पहले नागरिक पुलिस में दरोगा बनने के लिए रैंकर परीक्षा का आयोजन किया जाता था। इसके लिए 10 किमी की दौड़ लगानी पड़ती थी। दौड़ के दौरान कई अभ्यर्थियों की मृत्यु होने के मामले सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। अब नागरिक पुलिस में दरोगा के आधे पदों को सीधी भर्ती, जबकि शेष आधे पदों को वरिष्ठता के आधार पर मुख्य आरक्षियों को प्रोन्नत करके भरा जाता है।
 

फैक्ट फाइल
- 10 मुख्य आरक्षी की सेवानिवृत्त में तीन माह बाकी हैं
- 12 कर्मी अगले वर्ष के अंत तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे
- 122 कर्मियों में से 90 की उम्र 50 वर्ष से अधिक है
- 32 की उम्र 40 से 50 वर्ष के बीच है
- 81 रिक्त पदों पर प्रोन्नति के लिए दौड़ में होना है शामिल

यह नियम अमानवीय और अन्यायपूर्ण है। हर उम्र में शरीर की अवस्था में बदलाव आता है। दौड़ के दौरान कई लोगों की मृत्यु होने पर इस नियम को समाप्त कराने का मैंने भी कई बार प्रयास किया था। भर्ती बोर्ड को दौड़ की जगह मशीनों के जरिए शारीरिक दक्षता परखे, जिसके मानक भी बहुत सख्त नहीं हो। कोरोना महामारी के बाद बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के मद्देनजर भी इसमें बदलाव करना बेहद आवश्यक है। -विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next