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सुल्तानपुर: सियार पकड़ने के लिए लगाया बंदर वाला पिंजरा, सियार आया और मांस का टुकड़ा दिया और भाग गया

Thu, 12 Sep 2024 12:17 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, सुल्तानपुर

सार

Jackal terror in Sultanpur: यूपी के सुल्तानपुर में अजीब घटना हुई। यहां पर सियार को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगाया। पिंचरा छोटा था, सियार आया और पिंजरे से मांस का टुकड़ा लेकर भाग गया। 
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सुल्तानपुर में सियारों को आतंक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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यूपी के सुल्तापुर के खैरहा गांव में सियार को पकड़ने के लिए बंदर का पिंजरा लगाने के बाद भी वनकर्मी गच्चा खा गए। बीती रात वनकर्मियों की ओर से बंदर के पिंजरे में रखा मांस का टुकड़ा लेकर सियार भाग गया। बुधवार सुबह वनकर्मियों की पड़ताल में खैरहा गांव में सियार और कोड़रिया में कुत्तों का पगचिह्न पाया गया। इससे ग्रामीणों में दहशत है।

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तीन सितंबर की रात कोड़रिया में एक मासूम को सियार के शिकार बना लेने की घटना के बाद से वन विभाग की टीम दियरा ग्राम पंचायत में डटी है। दो दिन बाद बगल के खैरहा गांव में वन्यजीव की दस्तक से वन विभाग की नींद उड़ गई है। खैरहा गांव निवासी लालती देवी के छप्पर में बंधी बकरी को खा लेने की सूचना के बाद रेंजर ने दोनों गांवों में एक-एक पिंजरा लगवा दिया है।

मंगलवार शाम वनकर्मियों ने सियार को पकड़ने के लिए लालती के घर के पीछे लगाए गए बंदर के पिंजरे में मांस का टुकड़ा रख दिया। रात में करीब दो बजे सियार मांस का टुकड़ा लेकर भाग गया। कुत्तों के शोर मचाने पर वनकर्मियों व ग्रामीणों के पहुंचते ही वह जंगल में भाग गया। मांस के टुकड़ा की छानबीन वनकर्मियों की ओर से गांव में लगाए गए स्पाई नाइट विजन कैमरे से की जा रही है। छानबीन में पाया गया है कि मांस का टुकड़ा लेकर सियार भागा है। रेंजर ने बताया कि कैमरों को जांच के लिए डिवीजन भेजा गया है।
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बड़ा पिंजरा भेड़िया, चीता और बाघ के पकड़ने में होता है प्रयोग
वनकर्मियों ने बताया कि बड़े पिंजरे का प्रयोग भेड़िया, चीता और बाघ जैसे आक्रामक जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए किया जाता है। छोटा पिंजरा शरारती बंदरों को पकड़ने के काम आता है। वन्यजीवों को पकड़ने के लिए उसमें मांस का टुकड़ा रखा जाता है। सियार के लिए बकरी का मांस रखा जाता है। खैरहा में लालती देवी के घर के पीछे बंदर पकड़ने का पिंजरा लगाया गया है जबकि कोड़रिया में बड़ा पिंजरा लगाया गया है। रेंजर अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि बड़े-छोटे दो तरह के पिंजरे प्रयोग में लाए जाते हैं। स्पाई नाइट विजन कैमरे से वन्यजीवों की फोटो ली जाती है।

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सियार ने फिर किया हमला, बकरी को बनाया निवाला

सियार को ढूंढते ग्रामीण। - फोटो : संवाद
 जिले में हमलावर हुए सियार ने सोमवार रात एक बकरी पर हमला कर दिया था। उसने बकरी को निवाला बना लिया। मंगलवार को उसका शव बाड़े में पड़ा पाया गया। बुधवार को सोशल मीडिया के जरिये जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। थाना क्षेत्र के बुद्धि मिश्र का पुरवा निवासी नवमीलाल पाल ने घर में ही बकरियों के लिए बाड़ा बना रखा है। सोमवार रात किसी सियार ने बाड़े के अंदर घुसकर एक बकरी को अपना निवाला बना डाला। बाड़े के अंदर मंगलवार सुबह बकरी मृत पाई गई। बकरी के पिछले भाग को सियार ने खा लिया था। नवमीलाल ने इसकी सूचना किसी को नहीं दी। रेंजर अवधेश वर्मा ने बताया कि घटना एक दिन पहले की है। बकरी को किस जानवर ने खाया है, उसे परिजन नहीं बता पा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को वन्यजीवों के हमले को लेकर जागरूक किया।

कुत्ते भी हो रहे हमलावर
इस समय कुत्ते भी हमलावर हो गए हैं। हिंसक जानवरों के पगचिह्न से उन्हें ढूंढ़ने में सहायता मिल सकती है। खैरहा में कुत्ते व कोड़रिया से खेत जाने वाले रास्ते में सियार के पैरों के निशान पाए गए हैं। इन दोनों गांवों में दो पिंजरे, जाल व छह कैमरे लगाए गए हैं। सूचना मिलने पर टीम पहुंचकर वन्यजीव के पैराें के निशान से उनकी पहचान करेगी।- अमित सिंह, डीएफओ

 
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