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UP: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे मामले में पीएनसी इंफ्राटेक ने दी सफाई, बोली- केवल 300 मीटर सड़क क्षतिग्रस्त

Sat, 08 Aug 2026 08:18 AM IST
Akash Dwivedi अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले में पीएनसी इंफ्राटेक ने सफाई देते हुए कहा कि प्रभावित हिस्सा करीब 300 मीटर है। कंपनी ने एनएसई-बीएसई को बताया कि उसे अभी डिबार या नॉन-परफॉर्मर घोषित नहीं किया गया है। एनएचएआई का कारण बताओ नोटिस प्रक्रियाधीन है और मरम्मत जारी है।
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की उन्नाव में धंसी सड़क - फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के धंसने और इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की कार्रवाई को लेकर पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) और बाम्बे स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) को सफाई दी है। 

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पीएनसी इंफ्राटेक ने अपने पत्र में खास तौर पर स्पष्ट किया है कि कंपनी को एनएचएआई ने न तो डिबार किया है और न ही ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित किया है। दावा किया है कि इस मामले का कंपनी की क्षमता या उसके कारोबार को जारी रखने पर कोई खास असर नहीं है। यह भी स्पष्ट किया है कि वह नई परियोजनाओं के लिए बोली प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है। कंपनी ने यह स्पष्टीकरण 6 अगस्त को एनएसई और बीएसई को भेजे पत्र में दिया है।

पीएनसी ने शेयर बाजार को बताया कि जिस परियोजना की बात हो रही है, उसे अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है, जो पीएनसी इंफ्राटेक की सहायक कंपनी है। इसका निर्माण पूरा हो चुका है और परियोजना के अस्थायी और अंतिम पूर्णता प्रमाणपत्र क्रमश: 1 अक्टूबर 2025 और 2 फरवरी 2026 को जारी किए गए थे। परियोजना की लागत 1513 करोड़ रुपये है।
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पीएनसी के मुताबिक, हाल में हुई लगातार भारी बारिश से एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से प्रभावित हुए। प्रभावित हिस्सों की कुल लंबाई करीब 300 मीटर है, जो पूरे एक्सप्रेसवे की लंबाई का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। कंपनी का कहना है कि उसने प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और सुधार का काम तुरंत शुरू कर दिया। ये भी दावा किया है कि एक्सप्रेसवे पर यातायात सुचारु रूप से चल रहा है।

 

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कंपनी से पूछा- कार्रवाई क्यों न की जाए

पीएनसी के पत्र के मुताबिक, एनएचएआई ने इस मामले में सहायक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें कंपनी से पूछा गया है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में जिन संभावित कार्रवाइयों का उल्लेख है, उनमें परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत जुर्माना, संबंधित तकनीकी अधिकारी के खिलाफ तीन साल तक डिबारमेंट की कार्रवाई, सहायक कंपनी की पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स (सड़क की स्थिति) रेटिंग घटाना शामिल हैं। 

पीएनसी के पत्र के अनुसार ये अभी प्रस्तावित कार्रवाइयां हैं। ये अंतिम दंड नहीं है। कंपनी ने कहा है कि नोटिस का जवाब एनएचएआई को दिया जा रहा है। कंपनी ने बताया कि एनएचएआई के निर्देश के मुताबिक परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता को हटा दिया गया है।

पीएनसी ने कहा है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और सुधार पर होने वाला खर्च कंपनी के नियमित रखरखाव बजट का हिस्सा है। यानी 15 साल की रखरखाव अवधि के दौरान सड़क की नियमित और बड़े स्तर की मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी की है।
 
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