बदले हुए तेवर के साथ यूपी के वोटर नए मूड में हैं। पंचायत चुनाव में जनता ने सभी दलों को आईना दिखा दिया है। जहां, सपा सरकार के कई मंत्री ‘अपनों’ की नैया पार नहीं लगा सके तो वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गांव जयापुर में ही भाजपा समर्थित उम्मीदवार को मुंह की खानी पड़ी है। कांग्रेस की तो दुर्गति ही हो गई है।
राहुल गांधी के गढ़ अमेठी में ही उसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। इन सबके बीच बसपा को नतीजों ने राहत दिया है। बसपा को हाथरस, अलीगढ़ समेत कई जिलों में अच्छी सफलता मिली है लेकिन कुछ जगह उसकी स्थिति कमजोर रही। वहीं, मैनपुरी में बूथ लूटने वाले पैक्सफेड के चेयरमैन सपा के तोताराम यादव 20वें स्थान पर रहे।
क्षेत्र पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्यों के 77576 पदों और जिला पंचायत सदस्यों के 3112 पदों के सोमवार शाम तक आए सभी नतीजों को वोटरों की चेतावनी मानी जा रही है। जिला पंचायत सदस्यों के लिए बड़ी तादाद में निर्दलीय प्रत्याशियों को जिताकर मतदाताओं ने अपने मिजाज का अहसास कराया है।
सपा के सूरमाओं को झटका
मंत्री मनोज पांडेय के भाई हारे : रायबरेली में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मनोज कुमार पांडेय के भाई अमिताभ पांडेय चुनाव हार गए हैं। सपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह के बेटे दिव्यांबर को भी हार का मुंह देखना पड़ा।
कृषि राज्यमंत्री का भतीजा हारा : कृषि राज्यमंत्री राजीव कुमार सिंह का भतीजा अमन सिंह को जिला पंचायत चुनाव में दरियाबाद से हार का सामना करना पड़ा है।
सपा महिला सभा अध्यक्ष के पति हारे : सीतापुर में सपा महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष गीता सिंह के पति शिवकुमार सिंह और बेटा राहुल सिंह भी बीडीसी सदस्य का चुनाव हार गए हैं। सपा विधायक राधेश्याम जायसवाल के भतीजे सतीश जायसवाल तथा बहू ममता जायसवाल को भी जनता ने नकार दिया है। सुल्तानपुर में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष जानकी पाल तो चौथे स्थान पर रहीं।
उद्यान मंत्री के परिवार के चारों सदस्य हारे
बलरामपुर में जंतु उद्यान राज्य मंत्री डॉ. एसपी यादव की पत्नी मिथलेश, बेटा राकेश और बहू जयप्रिया तथा नजदीकी रिश्तेदार कांती यादव डीडीसी सदस्य बनने में नाकाम रहे हैं। सपा विधायक जगराम पासवान के भाई अन्नू पासवान तथा भाई की पत्नी माधुरी पासवान भी चुनाव हार गई हैं।
बंशीधर बौद्ध की बहू हारीं: बहराइच में राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध की बहू ज्ञानवती देवी को बसपा समर्थित ऊषा देवी से हार का सामना करना पड़ा।
मोदी की काशी में भाजपा चित
जिला पंचायत की 48 में महज 9 सीटों पर ही भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते। 22 से अधिक सीटों पर सपा समर्थित प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया। मोदी के आदर्श गांव जयापुर में भाजपा समर्थित बीडीसी उम्मीदवार को 800 मतों से हार का सामना करना पड़ा।
बहराइच में भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले के चाचा अक्षयवरलाल कनौजिया हार गए। रायबरेली में कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की अनुज वधू और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन सिंह भी चुनाव नहीं जीत सकीं।
राहुल की अमेठी में कांग्रेस पस्त
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी जिला पंचायत चुनाव में कांग्रेसियों को करारी हार का सामना करना पड़ा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्र 36 सदस्यों वाली जिला पंचायत में मात्र 8 सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं। सपा को 18 सीटों पर जीत हासिल हुई।
मुलायम के गढ़ में घुसे ओवैसी
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में जिला पंचायत सदस्य की सीट जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन ने यूपी की सियासत में दस्तक दे दी है। यहां से कैलाश कुमार गौतम चुने गए।
मुजफ्फरनगर में भाजपा-सपा दरकिनार
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुजफ्फरनगर दंगे से वोटों का ध्रुवीकरण हुआ वहां जिला पंचायत की 42 में से 29 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। भाजपा को 6 और सपा-बसपा को चार-चार सीटें मिली हैं।
कई मंत्रियों के रिश्तेदार को जीत भी मिली
कैबिनेट मंत्रियों में महबूब अली के परिवार के पांच सदस्य चुनाव जीते हैं। शाहिद मंजूर, अरविंद सिंह गोप, विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, नितिन अग्रवाल, कैलाश यादव, राजकिशोर, दुर्गा प्रसाद यादव समेत कई मंत्रियों के परिवार के सदस्य चुनाव जीत गए हैं लेकिन एक दर्जन को वोटरों ने नकार दिया है।
लव मैरिज से सियासत में एंट्री
मुजफ्फरनगर जिला पंचायत में एससी आरक्षित 5 वार्डों में वे महिलाएं कामयाब हुईं, जिन्होंने दूसरे धर्म और जाति में लव मैरिज की थी। खास बात यह रही कि जिन बिरादरियों में उनकी शादी हुई, उन्होंने बंपर वोट दिए। इनमें दीप्ति पाल, रूबी और आंचल ने गैर जाति के युवकों से विवाह किया है, जबकि अनीता उर्फ आमरीन और छोटी उर्फ छोटी बेगम ने गैर समुदाय में शादी की थी।
प्रदेश के 74 जिलों में हो रहे थे चुनाव
पंचायत चुनाव के सभी परिणाम सोमवार देर रात तक घोषित कर दिए गए। क्षेत्र पंचायत सदस्यों के परिणाम तो राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिए गए हैं, लेकिन जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम अपलोड करने में विलंब हो रहा है। मतगणना में नौ जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। 74 जिलों में से 65 जिलों में तो दोपहर में ही मतगणना पूरी हो गई थी।
प्रदेश के 74 जिलों में पंचायत चुनाव हो रहे थे। इनमें से नौ जिलों में मतगणना का काम सबसे सुस्त रहा। इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, बांदा, चित्रकूट, बस्ती, महराजगंज, कुशीनगर व गोंडा शामिल हैं।
आईजी कानून-व्यवस्था ए सतीश गणेश ने बताया कि इन सभी जिलों के डीएम व कप्तान को जल्दी मतगणना खत्म कराने के निर्देश दिए गए। इसी के बाद मतगणना में तेजी लाई गई। इसके बावजूद कई जिलों में रात तक मतगणना का काम चलता रहा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी गोंडा जिले के डीएम को फोन कर जल्दी मतगणना खत्म कराने के साथ ही ऑनलाइन रिजल्ट फीड करने के निर्देश दिए।
आयोग के अफसर देर रात तक देते रहे आदेश
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों के 77576 पदों के परिणाम जारी हो गए थे। वहीं, जिला पंचायत सदस्यों के 3112 पदों में से करीब 2200 पदों के परिणाम वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए थे। आयोग के अफसर देर रात तक जिलों के अफसरों से जल्दी-जल्दी परिणाम अपलोड कराने के निर्देश देते रहे।
आधा दर्जन जिलों में मतगणना के दौरान बवाल
मतगणना के दौरान आधा दर्जन जिले ऐसे रहे जहां बवाल हुआ। इनमें गाजीपुर, अंबेडकरनगर, मऊ, बदायूं, आगरा व पीलीभीत जिले शामिल हैं। आईजी ने बताया कि अंबेडकरनगर के टांडा में 22 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
वहीं, गाजीपुर के करंडा थानाक्षेत्र में मतगणना के दौरान बवाल करने वाले आठ लोगों को नामजद किया गया है। इनमें से पांच को पुलिस ने हिरासत में लिया है। मऊ के मधुबन के साथ ही आगरा के ताजगंज थानाक्षेत्र में भी बवाल हुआ। पीलीभीत के बीसलपुर थानाक्षेत्र में भी मतगणना के दौरान अप्रिय स्थिति पैदा हुई।