नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में 38 जिलों में बृहस्पतिवार को मतदान होगा। लोकसभा चुनाव से करीब एक वर्ष पहले हो रहे निकाय चुनाव में 7 नगर निगम, 95 नगर पालिका परिषद, 268 नगर पंचायत में मतदाताओं की कसौटी पर राजनीतिक दलों की परीक्षा होगी। सात नगर निगम के साथ जिला मुख्यालय की 31 नगर पालिका परिषद के चुनाव नतीजों पर सभी की नजर रहेगी। नगर निगम चुनाव में अलीगढ़, शाहजहांपुर, मेरठ और कानपुर में जहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। वहीं गाजियाबाद में भाजपा का पलड़ा भारी है। अयोध्या और बरेली में भाजपा-सपा के बीच सीधा मुकाबला है।
कानपुर में त्रिकोणीय मुकाबला
कानपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। भाजपा ने निर्वतमान महापौर प्रमिला पांडेय को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा ने विधायक अमिताभ वाजपेयी की पत्नी वंदना वाजपेयी को प्रत्याशी बनाया हैं। कांग्रेस आशनी विकास अवस्थी को मुकाबले में उतारा है। ब्राह्मण बहुल कानपुर नगर निगम क्षेत्र में तीनों ही प्रमुख दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे हैं। बसपा ने अर्चना निषाद को प्रत्याशी बनाया है। ब्राह्मण वोट बैंक में बंटवारा होने पर सपा प्रत्याशी को जहां मुस्लिम वोट बैंक का सहारा मिलने का भरोसा है। वहीं भाजपा प्रत्याशी को ठाकुर और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं से उम्मीद है।
अयोध्या में भाजपा - सपा की सीधी लड़ाई
मतदान की तिथि करीब आने के साथ प्रदेश में सबसे अहम मानी जाने वाली नगर निगम अयोध्या में चुनावी तस्वीर साफ होने लगी है। नगर निगम के महापौर पद के लिए कुल नौ प्रत्याशी मैदान में है लेकिन मुकाबला भाजपा प्रत्याशी महंत गिरीश पति त्रिपाठी और सपा प्रत्याशी आशीष पांडेय के बीच आमने-सामने होने की संभावना है। कांग्रेस से प्रमिला राजपूत, बसपा प्रत्याशी राम मूर्ति यादव इसे त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में हैं। आम आदमी प्रत्याशी इं. कुलभूषण साहू बीच से अपना रास्ता बनाने की कोशिश में है। क्षेत्रवार दलों का प्रभाव अलग-अलग देखा जा रहा है। कहीं किसी पार्टी की ओर रूझान है तो कहीं दूसरे दल के प्रति रुझान महसूस किया जा रहा है।
मेरठ में महापौर के लिए त्रिकोणीय मुकाबला
मेरठ नगर निगम में महापौर चुनाव में अभी तक त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं का रुख पूरे चुनाव की तस्वीर पलट सकता है। सभी दलों के नजरें मुस्लिम मतदाताओं पर ही टिकी हैं। भाजपा से हरिकांत अहलूवालिया मैदान में हैं तो सपा से सीमा प्रधान प्रत्याशी हैं। बसपा से हशमत मलिक चुनाव मैदान में हैं। चुनावी समीकरण को देखते हुए भाजपा के हरिकांत अहलूवालिया, सपा की सीमा प्रधान और हशमत मलिक के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। सपा का दावा है कि मुस्लिम वोट उनके प्रत्याशी के पक्ष में जाएंगे तो वहीं, बसपा का दावा है मुस्लिम मतदाता उनके साथ रहेंगे। सबसे ज्यादा दारोमदार मुस्लिम मतदाताओं पर ही रहेगा। मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण जिस प्रत्याशी के पक्ष में हुआ वही टक्कर में आ जाएगा। दलित मतदाता भी चुनाव में निर्णायक भूमिका में रह सकते हैं।